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सुकमा के आदिवासी परिवार की सफलता, मनमोहन ब्रिज ने रचा इतिहास.....

Puja Rahi
सुकमा के आदिवासी परिवार की सफलता, मनमोहन ब्रिज ने रचा इतिहास.....
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सुकमा जिले के छिंदगढ़ ब्लॉक के अंतर्गत आने वाला गांव बारसेरास के एक सेवानिवृत शिक्षक मनमोहन ब्रिज ने सुकमा जिले के लिए एक मिसाल पेश की, मनमोहन ब्रिज ने अपने शिक्षण कार्य के दौरान आसपास के स्कूल में सेवा देते हुए कई बच्चों को अच्छे पदों पर पहुंचने के लिए मार्गदर्शन किया,और साथ ही साथ अपने बच्चों को भी अति संवेदनशील कहे जाने वाले सुकमा जिले में भी इतना शिक्षित बना दिया कि आज बच्चे जज एवं डॉक्टर जैसे बड़े पदों पर पदस्थ हैं ।

मनमोहन ब्रिज के सात बच्चों में वर्तमान में चार बच्चे सरकारी नौकरी में सेवा दे रहे हैं जहां बड़ी बच्ची जज की नौकरी में है, तो वही बड़ा लड़का जगदलपुर संभाग मुख्यालय में न्यूरो सर्जन के रूप में सेवा दे रहे हैं, उनके बाद जो बेटी है वह स्टाफ नर्स में पदस्थ है, और उसके बाद एक लड़की दोरनापालनापाल जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्र में एमबीबीएस डॉक्टर के कार्य पर सेवा दे रही है ।

मनमोहन ब्रिज अपने शैक्षणिक कार्यकाल के बाद अब वर्तमान में क्षेत्र के बड़े किसानों में जाने जाते हैं, खेतों में धान की फसल के साथ-साथ मछली पालन भी वृहद तरीके से कर रहे हैं, जिले में बड़े मछली पालन करने वाले किसानों में उनका नाम शामिल है,अति संवेदनशील कहा जाने वाला सुकमा जिला अब नक्सल के नाम से ही नही बल्कि शिक्षा और खेती के लिए भी जाना जाने लगा है।

एक समय जब सुकमा में बच्चो के शिक्षा के लिए अच्छे स्कूल भी नही हुआ करते थे,उस समय मनमोहन बृज ने अपने बच्चों को बड़े मुकाम में पहुचाने का सपना देखा,जो कि आज पूरा हो गया है,सुकमा जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र से घर मे डॉक्टर बन जाना ही बड़ी बात होती है,ऐसे में एक घर से 1 जज और 2 डॉक्टर बनना बड़ी उपलब्धि है,जिले में आदिवासी भाइयों को शिक्षा को लेकर प्रेरित करते हुए,अच्छे मुकाम पर पहुचने के लिए आज भी बृज सर लोगों को मार्गदर्शन दे रहे है,और जो बच्चें आगे पढ़ने के लिए इक्छुक है उनको आर्थिक सहयोग भी करते है।


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