शिवराज सिंह चौहान
भोपाल। “मामा” शब्द भारतीय समाज में केवल एक रिश्ते का नाम नहीं है, बल्कि यह भरोसे, अपनत्व और निःस्वार्थ संरक्षण का प्रतीक है। मामा वह होता है, जिसके घर में बच्चा बिना डर के हँसता है, जिसके कंधे पर सिर रखकर अपने मन का बोझ हल्का कर सकता है और जिसके साये में यह विश्वास रहता है कि कोई अपना हर परिस्थिति में साथ देगा। जब राजनीति में कोई नेता इसी संबोधन से पहचाना जाने लगे, तो उसके पीछे केवल लोकप्रियता नहीं, बल्कि वर्षों का संवेदनशील व्यवहार, पीड़ा को समझने की क्षमता और संकट के समय साथ खड़े होने का साहस छिपा होता है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए “मामा” शब्द यही भाव रचता आया है और रायसेन की एक दर्दनाक घटना में उनका आचरण इसे एक बार फिर जीवंत करता है।
रायसेन की घटना और समाज की पीड़ा
रायसेन जिले के गौहरगंज क्षेत्र में छह साल की मासूम बच्ची के साथ हुई जघन्य दुष्कर्म की घटना ने पूरे प्रदेश और समाज को भीतर तक झकझोर दिया। ऐसी घटनाएँ केवल किसी एक परिवार का दर्द नहीं होतीं, बल्कि पूरे समाज की अंतरात्मा को घायल कर देती हैं। शुरुआत में सहानुभूति और आक्रोश की लहर उठती है, लोग पीड़ित परिवार के साथ खड़े दिखाई देते हैं, लेकिन समय के साथ यह समर्थन अक्सर कमजोर पड़ जाता है। धीरे-धीरे पीड़ित परिवार अपने डर, आघात और भविष्य की अनिश्चितताओं के साथ अकेला रह जाता है। शिवराज सिंह चौहान ने इसी कड़वी सच्चाई को महसूस किया और इसे केवल शोक संदेश तक सीमित नहीं रखा।

संवेदना से जिम्मेदारी तक
घटना पर संज्ञान लेते हुए शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट कहा कि केवल दुख जताना पर्याप्त नहीं है, पीड़िता बेटी का भविष्य सुरक्षित करना समाज और नेतृत्व दोनों की जिम्मेदारी है। इसी सोच के तहत उन्होंने पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की। यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि यह सहायता किसी सरकारी योजना या औपचारिक निधि से नहीं, बल्कि आपसी सहयोग से जुटाई गई है। इसके पीछे संदेश साफ है संवेदना किसी आदेश या नियम से नहीं, बल्कि मन से उपजती है, और यह मन केवल किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे समाज का प्रतिनिधित्व करता है।
दीर्घकालिक सुरक्षा का भरोसा
यह सहायता केवल तत्काल राहत तक सीमित नहीं है। यह राशि बच्ची के नाम से उसके खाते में डिपॉजिट की जाएगी, जो उसके 18 वर्ष की आयु तक बढ़कर लगभग 18 लाख रुपये हो जाएगी। इसके अलावा इसी फंड से समय-समय पर उसकी शिक्षा और अन्य आवश्यक खर्चों की व्यवस्था भी की जाएगी। यह कदम बताता है कि यह मदद क्षणिक नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सुरक्षा और भविष्य की गारंटी है। यह भरोसा है कि यह बेटी अकेली नहीं है और उसका भविष्य अंधेरे में नहीं छोड़ा गया है।
नेतृत्व की संवेदनशील सोच
इस अवसर पर शिवराज सिंह चौहान ने समाज को आईना दिखाते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों में समाज कुछ समय तक साथ देता है, लेकिन बाद में पीड़ित परिवार अकेला पड़ जाता है। उन्होंने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि इस परिवार पर शिक्षा और जीवनयापन का अतिरिक्त बोझ न आए और बच्ची को आगे बढ़ने के लिए हर संभव सहारा मिले। यही वह सोच है, जो एक सामान्य प्रशासक से आगे बढ़कर किसी नेता को “मामा” बना देती है।

कानूनी कार्रवाई और प्रशासनिक तत्परता
घटना के बाद कानून व्यवस्था ने भी तत्परता दिखाई। नवंबर 2025 में घटी इस घटना के आरोपी सलमान को भोपाल से गिरफ्तार किया गया। 27 नवंबर की रात जब पुलिस उसे रायसेन ले जा रही थी, तब भोपाल से लगभग 30 किलोमीटर दूर कीरत नगर के पास पुलिस वाहन का टायर पंक्चर हो गया। मौके का फायदा उठाकर आरोपी ने एक एसआई की पिस्टल छीन ली। इसके बाद रायसेन ले जाते समय एक शॉर्ट एनकाउंटर में वह घायल हुआ। यह पूरा घटनाक्रम दर्शाता है कि प्रशासन ने आरोपी को पकड़ने और न्याय की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में कोई ढिलाई नहीं बरती।
सत्ता, संरक्षण और नैतिक जिम्मेदारी
कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ समाज का नैतिक कर्तव्य भी होता है पीड़ित के साथ खड़े रहना। शिवराज सिंह चौहान का यह कदम इसी नैतिक जिम्मेदारी का विस्तार है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि सत्ता का अर्थ केवल शासन करना नहीं, बल्कि संरक्षण देना भी है। नेतृत्व का मतलब केवल फैसले लेना नहीं, बल्कि समाज के दर्द को महसूस करना और उसे कम करने का प्रयास करना भी है।
“मामा” की राजनीति और भरोसे की नींव
आज जब समाज अक्सर असंवेदनशीलता की शिकायत करता है, तब ऐसे उदाहरण उम्मीद जगाते हैं। “मामा” का यह स्वरूप राजनीति के उदात्त अर्थ को समझाता है, जहाँ नीतियों के साथ-साथ टूटे भरोसे को जोड़ना भी उतना ही जरूरी है। रायसेन की वह मासूम बेटी शायद अभी इन बातों को न समझ पाए, लेकिन जब वह बड़ी होगी और अपने सपनों की उड़ान भरेगी, तो उसके जीवन की नींव में यह भरोसा जरूर शामिल होगा कि उसके सबसे अंधेरे समय में किसी ने उसका हाथ थामा था वह उसका अपना, प्रदेश का “मामा” शिवराज मामा था।
