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Shashi Tharoor: 'खामेनेई की मौत पर समय पर जताना चाहिए था शोक', भारत सरकार के रुख पर शशि थरूर का बड़ा बयान, कहा- भले ही निंदा…

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Shashi Tharoor
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नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने कहा है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई (Ali Khamenei) की मौत पर भारत को तुरंत शोक संदेश भेजना चाहिए था। उनके अनुसार, भले ही भारत अमेरिका और इस्राइल की कार्रवाई की निंदा न करता, लेकिन संवेदना व्यक्त करना एक उचित और संतुलित कदम होता।

सरकार के रुख पर उठे सवाल

थरूर ने कहा कि वह उन लोगों से सहमत हैं जो सरकार के इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं। उनका मानना है कि खामेनेई की भूमिका और प्रभाव को देखते हुए भारत को उसी दिन अपनी संवेदनाएं प्रकट करनी चाहिए थीं, जिससे एक सकारात्मक कूटनीतिक संदेश जाता।

रईसी की घटना का दिया उदाहरण

उन्होंने 2024 में ईरान के पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी (Ebrahim Raisi) की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में हुई मौत का जिक्र किया। थरूर ने बताया कि उस समय भारत ने तुरंत राजकीय शोक घोषित कर संवेदना व्यक्त की थी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास में शोक पुस्तिका खुलने पर विदेश सचिव का वहां जाना एक सही कदम था।

शोक और निंदा में फर्क

थरूर ने स्पष्ट किया कि शोक व्यक्त करना और किसी घटना की निंदा करना दो अलग बातें हैं। उनका कहना था कि यदि राजनीतिक कारणों से भारत हमले की आलोचना नहीं करना चाहता, तो यह उसकी नीति हो सकती है, लेकिन शोक जताना मानवीय संवेदना का प्रतीक है।

संयम को बताया ताकत

उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय संकट के समय सरकार को संयम के साथ काम करना चाहिए। संयम का अर्थ कमजोरी नहीं, बल्कि यह एक रणनीतिक ताकत है, जो यह दर्शाती है कि देश अपने हितों को समझता है और उनकी रक्षा के लिए सोच-समझकर कदम उठाता है।

विपक्ष के रुख की सराहना

थरूर ने सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) समेत विपक्ष के अन्य नेताओं के रुख की सराहना करते हुए कहा कि विपक्ष नैतिक दृष्टिकोण रख सकता है, लेकिन सरकार को व्यावहारिक और संतुलित नीति अपनानी चाहिए।


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