दुर्ग : दुर्ग जिले में ठंड का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। जिले का न्यूनतम तापमान लगातार गिरावट पर है, जिससे रात के समय ठिठुरन बढ़ गई है। दिनभर धूप रहने के बावजूद अधिकतम तापमान भी कम बना हुआ है। स्टील सिटी दुर्ग-भिलाई में लोग गर्म कपड़ों और अलाव का सहारा ले रहे हैं। सर्द हवाओं और गिरते पारे ने मैत्री बाग में वन्य प्राणियों के लिए विशेष इंतजाम करने पर मजबूर कर दिया है।
मैत्री बाग में बाघों और अन्य जानवरों के लिए इंतजाम
दुर्ग के मैत्री बाग में व्हाइट टाइगर, बाघों और अन्य जानवरों की ठंड से रक्षा के लिए खास प्रबंध किए गए हैं। बाघ के बाड़ों में अलाव जलाने की व्यवस्था की गई है, जिसकी निगरानी बाग के कर्मचारी कर रहे हैं। बाग के प्रभारी एन.के. जैन ने बताया कि व्हाइट टाइगर की संवेदनशीलता को देखते हुए उसके लिए विशेष ध्यान दिया गया है।
इसके अलावा, अन्य वन्य प्राणियों के बाड़ों में हीटर, हैलोजन और घास की गर्मी का प्रबंध किया गया है। पक्षियों के पिंजरों में भी हैलोजन लगाए गए हैं ताकि रात के समय उन्हें ठंड का सामना न करना पड़े। शाम के समय जानवरों के बाड़ों के सामने अलाव जलाए जा रहे हैं, जिससे उन्हें गर्मी मिल सके।
व्हाइट टाइगर के लिए खास देखभाल
मैत्री बाग के प्रभारी ने बताया कि सफेद शेर ठंड के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं। उनकी सेहत पर ठंड का बुरा असर न पड़े, इसलिए उनके लिए बाड़े में अलाव जलाने की व्यवस्था की गई है। रात के समय गिरते पारे को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
पक्षियों और अन्य प्राणियों को भी मिल रही राहत
पक्षियों के पिंजरों में हैलोजन लाइट्स लगाई गई हैं, जिससे उन्हें रात के समय गर्मी मिल सके। अन्य जानवरों के लिए घास और गर्म उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह ठंड का दौर वन्यजीवों के लिए चुनौतीपूर्ण है, लेकिन मैत्री बाग में किए गए इंतजाम उन्हें राहत पहुंचा रहे हैं।
दुर्ग में पारा गिरने का सिलसिला जारी है, लेकिन वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और प्रबंध उनकी देखभाल सुनिश्चित कर रहे हैं। वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए यह बाग सर्दी में भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।