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खेतो में अवशेष पर लगाया जा रहा आग , मिट्टी पर्यावरण हो रह खराब....

Dev Verma
खेतो में अवशेष पर लगाया जा रहा आग , मिट्टी पर्यावरण हो रह खराब....
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खेतो में अवशेष पर लगाया जा रहा आग , मिट्टी पर्यावरण हो रह खराब….

धमतरी : छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में खेतों में फसल अवशेष जलाने का मामला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। प्रशासन के बार-बार अपील और चेतावनी के बावजूद किसान खुलेआम अपने खेतों में पराली जला रहे हैं। यह स्थिति न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि मिट्टी की उपजाऊ क्षमता भी खराब हो रही है।

नगरी सिहावा क्षेत्र बना हॉटस्पॉट
धमतरी जिले के नगरी सिहावा क्षेत्र में किसान खेतों की सफाई के नाम पर पराली को आग के हवाले कर रहे हैं। सिरसिदा और सांकरा जैसे गांवों में यह समस्या ज्यादा गंभीर है। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि किसान बेखौफ होकर अवशेष जला रहे हैं, जिससे कई जीव-जंतु जलकर राख हो रहे हैं।

प्रशासनिक कार्रवाई सिर्फ चेतावनी तक सीमित
हालांकि, पराली जलाने को अपराध माना गया है और इसके लिए प्रति एकड़ ₹2,000 जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन जमीनी स्तर पर सख्त कार्रवाई का अभाव दिख रहा है। यही कारण है कि किसान प्रशासन की चेतावनी को नजरअंदाज कर रहे हैं। यह लापरवाही पराली जलाने की समस्या को एक फैशन में बदल रही है।

कृषि विभाग ने दिया बयान
कृषि विभाग का कहना है कि पराली जलाने वालों पर कार्रवाई की जा रही है, और जो किसान चोरी-छिपे ऐसा कर रहे हैं, उन्हें भी बख्शा नहीं जाएगा। बावजूद इसके, जमीनी स्तर पर प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है, ताकि इस समस्या को रोका जा सके।

पर्यावरण और मिट्टी पर गंभीर प्रभाव
पराली जलाने से पर्यावरण में जहरीली गैसों का उत्सर्जन होता है, जो वायु प्रदूषण को बढ़ाता है। साथ ही, मिट्टी के पोषक तत्व भी नष्ट हो जाते हैं। इससे भविष्य में कृषि उत्पादन पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।

जरूरत है सख्त कदमों की
पराली जलाने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए प्रशासन को अब चेतावनी से आगे बढ़कर सख्त कार्रवाई करनी होगी। साथ ही, किसानों को पराली के निस्तारण के वैकल्पिक उपायों के प्रति जागरूक करने की भी आवश्यकता है।

बहरहाल, धमतरी में पराली जलाने का यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर कितनी सख्ती से लगाम लगाता है।


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