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Republic Day : पहले गणतंत्र दिवस पर भारत का मेहमान कौन था?

Puja Rahi
Republic Day : पहले गणतंत्र दिवस पर भारत का मेहमान कौन था?
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Republic Day : भारत का पहला गणतंत्र दिवस, 26 जनवरी 1950, भारतीय इतिहास का एक ऐसा सुनहरा दिन था, जब हमारा देश एक गणराज्य के रूप में दुनिया के सामने उभरा। यह दिन न केवल भारतीय लोकतंत्र की नींव का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारत ने शुरुआत से ही वैश्विक संबंधों को प्राथमिकता दी। इसी कड़ी में, पहले गणतंत्र दिवस पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति डॉ. सुकर्णो को भारत ने मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया। यह निर्णय न केवल दो देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को दर्शाता है, बल्कि इसके पीछे की कहानी भी दिलचस्प है।

डॉ. सुकर्णो: एक प्रमुख अतिथि

डॉ. सुकर्णो, जो इंडोनेशिया के पहले राष्ट्रपति थे, को भारत ने 1950 के गणतंत्र दिवस पर अपने मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया। यह भारत और इंडोनेशिया के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक था। दोनों देश स्वतंत्रता संग्राम के दौरान औपनिवेशिक शासन के खिलाफ लड़ाई के साथी रहे हैं। भारत और इंडोनेशिया ने अपनी स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया और यह आमंत्रण उस संघर्ष की साझेदारी का प्रतीक था।

गणतंत्र दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

26 जनवरी का दिन भारत के लिए खास इसलिए भी है क्योंकि इसी दिन 1930 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की मांग की थी। इसी तिथि को चिह्नित करते हुए 1950 में भारत का संविधान लागू हुआ और हमारा देश एक गणराज्य बना। इस ऐतिहासिक अवसर को और भी खास बनाने के लिए एक ऐसे अतिथि को आमंत्रित किया गया, जिनके देश ने भी स्वतंत्रता के लिए एक लंबा संघर्ष किया था।

भारत-इंडोनेशिया संबंधों की शुरुआत

भारत और इंडोनेशिया के बीच सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों की जड़ें हजारों साल पुरानी हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, धर्म और सांस्कृतिक आदान-प्रदान ने उनके संबंधों को और मजबूत किया। यह पहली गणतंत्र दिवस पर डॉ. सुकर्णो को आमंत्रित करने का मुख्य कारण था, क्योंकि यह वैश्विक मंच पर भारत की दोस्ती और सहयोग की नीति का संकेत था।

Republic Day

1950 का गणतंत्र दिवस समारोह आज की भव्य परेडों और प्रदर्शन की तुलना में सरल था, लेकिन इसका महत्व बहुत बड़ा था। यह समारोह भारत के लोकतांत्रिक भविष्य की ओर पहला कदम था। डॉ. सुकर्णो ने भारत के इस ऐतिहासिक क्षण का हिस्सा बनकर इसे और खास बना दिया।

डॉ. सुकर्णो और नेहरू की दोस्ती

डॉ. सुकर्णो और पंडित जवाहरलाल नेहरू के बीच व्यक्तिगत मित्रता भी इस आमंत्रण का एक प्रमुख कारण थी। दोनों नेता समान विचारधारा के थे और उपनिवेशवाद के खिलाफ संघर्ष में एक-दूसरे के सहयोगी थे। इस दोस्ती ने भारत और इंडोनेशिया के संबंधों को एक नई ऊंचाई दी।

पहले गणतंत्र दिवस पर डॉ. सुकर्णो को मुख्य अतिथि बनाना भारत के लिए वैश्विक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। यह न केवल भारत और इंडोनेशिया की मित्रता का प्रतीक था, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारत ने अपनी स्वतंत्रता के बाद से ही वैश्विक सहयोग और साझेदारी को प्राथमिकता दी। यह घटना आज भी भारत के गणतंत्र दिवस के इतिहास का एक गौरवशाली अध्याय है।


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