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Report: नई दिल्ली: दुनिया भर में युद्ध और संकटग्रस्त क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के मामलों में भारत को सबसे “प्रोएक्टिव और रिस्पॉन्सिव” देशों में शामिल किया गया है। एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े निकासी अभियानों के जरिए हजारों नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला है। इन अभियानों की सफलता के पीछे तेज कूटनीतिक प्रयास, विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और मजबूत सैन्य लॉजिस्टिक्स को अहम माना गया है।
Report: विदेशी नागरिकों की भी की मदद
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि भारत ने केवल अपने नागरिकों को ही नहीं बल्कि संकट के समय अन्य देशों के नागरिकों को भी सुरक्षित निकालने में सहयोग दिया। इससे वैश्विक स्तर पर भारत की मानवीय छवि और मजबूत हुई है। जब ईरान-इजराइल युद्ध (Iran–Israel conflict) के कारण मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ा, तब सरकार ने स्थिति पर लगातार नजर रखी और जरूरत पड़ने पर निकासी की तैयारियां तेज कर दीं। विदेश मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया कि विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
Report: ‘ऑपरेशन सिंधु’ से नागरिकों की वापसी
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के दौरान भारत ने ऑपरेशन सिंधु (Operation Sindhu) शुरू किया। इस अभियान के तहत भारतीय नागरिकों को पहले आर्मेनिया पहुंचाया गया और उसके बाद विशेष विमानों के जरिए उन्हें सुरक्षित भारत लाया गया। रिपोर्ट में इस पूरी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित और सुरक्षित बताया गया है।
Report: रूस-यूक्रेन युद्ध में ‘ऑपरेशन गंगा’
रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia–Ukraine War) के दौरान भारत ने ऑपरेशन गंगा (Operation Ganga) के माध्यम से 23,000 से अधिक भारतीयों को सुरक्षित निकाला। साथ ही 18 देशों के 147 विदेशी नागरिकों को भी सहायता दी गई। इन लोगों को पहले पोलैंड, रोमानिया, हंगरी, स्लोवाकिया और मोल्दोवा जैसे पड़ोसी देशों में पहुंचाया गया और फिर विशेष उड़ानों से भारत लाया गया।

