Ram Mandir
Ram Mandir Case : अयोध्या। अयोध्या राम मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए चढ़ावे में हेराफेरी का मामला अब बड़े घोटाले का रूप ले चुका है। विशेष जांच टीम (SIT) की रिपोर्ट में मंदिर के दान प्रबंधन व्यवस्था में भारी लापरवाही और सुरक्षा नियमों (SOP) के उल्लंघन का खुलासा हुआ है।
Ram Mandir Case : SOP की उड़ाई गई धज्जियां
SIT जांच में सामने आया कि 2025 में तय किए गए सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था। नोट गिनने वाले स्टाफ को बिना जेब वाले कपड़े पहनने का नियम था, ताकि कोई पैसा न छिपा सके, लेकिन इस नियम की अनदेखी की गई। गिनती वाले कमरे में आने-जाने वाले हर व्यक्ति की तलाशी लेने और सुरक्षा गार्ड तैनात रखने का प्रावधान भी लागू नहीं किया गया। सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि CCTV फुटेज को 180 दिनों तक सुरक्षित रखना अनिवार्य था, लेकिन इसे सिर्फ 45 दिनों में ही मिटा दिया गया।
Ram Mandir Case : चंपत राय के पूर्व ड्राइवर के पास थीं हुंडियों की चाबियां
SIT रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के पूर्व ड्राइवर रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के पास कई दानपात्रों (हुंडियों) की चाबियां थीं। टिन्नू ने अपने रिश्तेदार मनीष कुमार यादव को भी कैश काउंटिंग यूनिट में नौकरी दिलवा दी थी।
Ram Mandir Case : बाथरूम से बरामद हुए 2.5 लाख रुपये
SIT गठन से ठीक पहले डोनेशन काउंटिंग रूम के पास बने बाथरूम से 2.5 लाख रुपये नकद लावारिस हालत में मिले थे। अब तक की कार्रवाई में 8 आरोपियों में से 6 के पास से करीब 80 लाख रुपये कैश और विदेशी मुद्रा बरामद की गई है। सभी आरोपियों को अदालत ने सोमवार तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
Ram Mandir Case : राजनीतिक घमासान तेज
इस मामले को सबसे पहले समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उठाया था। राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने शुरू में आरोपों को खारिज किया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 13 जून को SIT गठित करने के आदेश दिए। SIT ने मात्र 6 दिनों में रिपोर्ट सौंप दी, जिसके आधार पर 25 जून को FIR दर्ज कर गिरफ्तारियां की गईं।

