Rajasthan News:
Rajasthan News: कोटा। अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाने की घोषणा ने राजस्थान के कोटा संभाग के निर्यातकों, व्यापारियों और उत्पादकों में हड़कंप मचा दिया है। इस फैसले से कोटा स्टोन, सैंड स्टोन, धनिया, डी-ऑयल्ड केक (डीओसी), डेयरी उत्पाद और केमिकल जैसे प्रमुख निर्यातक उत्पादों की अमेरिकी बाजार में मांग कम होने की आशंका है। इससे स्थानीय उद्योगों और अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ सकता है।
Rajasthan News: कोटा स्टोन और सैंड स्टोन उद्योग पर खतरा
कोटा स्टोन, जो अपनी मजबूती और आकर्षक डिजाइन के लिए वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध है, का अमेरिका में सालाना करीब 100 करोड़ रुपये का निर्यात होता है। टैरिफ वृद्धि से इसकी कीमतों में इजाफा होगा, जिसके कारण अमेरिकी खरीदार अन्य देशों, जैसे तुर्की या ब्राजील, की ओर रुख कर सकते हैं। इसी तरह, सैंड स्टोन का भी लगभग 100 करोड़ रुपये का सालाना निर्यात प्रभावित होने की आशंका है। निर्यातक रामस्वरूप शर्मा ने कहा, “यह टैरिफ वृद्धि हमारे लिए बड़ा झटका है। हमारी प्रतिस्पर्धी कीमतें ही हमारी ताकत थीं, जो अब खतरे में हैं।”
Rajasthan News: कृषि क्षेत्र में बढ़ी चिंता
कोटा, बारां और झालावाड़ जिले, जो देश के सबसे बड़े धनिया उत्पादक क्षेत्रों में शुमार हैं, भी इस फैसले से चिंतित हैं। इन जिलों से अमेरिका को सालाना लाखों टन धनिया निर्यात होता है। टैरिफ बढ़ने से अमेरिकी व्यापारी वियतनाम या अन्य देशों से सस्ता धनिया खरीदने का विकल्प चुन सकते हैं।
इसके अलावा, सोया प्रोसेसिंग प्लांटों से डी-ऑयल्ड केक (डीओसी) का सालाना 50 करोड़ रुपये का निर्यात और अन्य कृषि उत्पादों का 100 करोड़ रुपये का निर्यात भी खतरे में है।
निर्यातक इस ट्रेड वार से बचने के लिए फिलहाल नई डील्स से पीछे हट रहे हैं। कई व्यापारियों ने अपने ऑर्डर होल्ड पर रख दिए हैं, जिसका असर आने वाले महीनों में स्पष्ट दिखाई देगा। कोटा चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष रवि गुप्ता ने बताया, “हम सरकार से आग्रह करेंगे कि वह अमेरिका के साथ बातचीत कर इस टैरिफ वृद्धि को कम करवाए। साथ ही, वैकल्पिक बाजारों की तलाश भी शुरू करनी होगी।”
Rajasthan News: अर्थव्यवस्था पर संभावित असर
कोटा संभाग की अर्थव्यवस्था में निर्यात का बड़ा योगदान है। टैरिफ वृद्धि से न केवल निर्यातक प्रभावित होंगे, बल्कि इससे जुड़े मजदूरों, ट्रांसपोर्टरों और छोटे व्यापारियों की आजीविका पर भी संकट मंडरा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैकल्पिक बाजार जैसे यूरोप, मध्य पूर्व या दक्षिण-पूर्व एशिया में जल्दी निर्यात नहीं बढ़ाया गया, तो स्थानीय उद्योगों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
