Raipur City News : रायपुर में गणेश उत्सव की धूम...पंडालों में बड़ी संख्या में पहुंच रहे भक्तजन, जगह-जगह हो रहा भंडारा

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Raipur City News : रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में गणेश उत्सव 2025 का उत्साह चरम पर है। भाद्रपद मास की शुक्ल चतुर्थी से शुरू होने वाला यह पर्व शहर में भक्ति, श्रद्धा और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर है। गणपति बप्पा की मनमोहक प्रतिमाओं और भव्य पंडालों ने रायपुर को उत्सव की रौनक से भर दिया है। हर गली, हर चौक-चौराहे पर भक्तों की भीड़ उमड़ रही है, जो विघ्नहर्ता के दर्शन और पूजन के लिए उत्साहित हैं।
रायपुर के गणेश पंडाल इस बार अपनी रचनात्मकता और भव्यता के लिए विशेष चर्चा में हैं। शहर के लाखेनगर चौक में स्थापित गणपति की प्रतिमा ने सभी का ध्यान आकर्षित किया है। इस प्रतिमा की खासियत है कि गणेश जी की पलकें झपकती हैं, जिससे भक्तों को जीवंत अनुभव मिलता है। यह मूर्ति भिलाई के औंधी गांव में तैयार की गई है, जिसकी लागत लगभग चार लाख रुपये बताई जा रही है, जबकि पूरे पंडाल की सजावट पर करीब 16 लाख रुपये खर्च किए गए हैं।

गुढ़ियारी में आयोजित गणेश उत्सव समिति का पंडाल इस बार "शिव महिमा" थीम पर सजा है। 12 हजार वर्ग फीट में फैला यह पंडाल भगवान शिव की विभिन्न लीलाओं जैसे अर्धनारीश्वर, गंगा अवतरण, सागर मंथन और भोलेनाथ की बारात को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है। यह पंडाल न केवल रायपुरवासियों बल्कि आसपास के जिलों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
गोल बाजार में श्री सार्वजनिक हनुमान मंदिर ट्रस्ट और श्री बजरंग नवयुवक गणेश उत्सव समिति ने बप्पा को 750 ग्राम सोने का नवरत्न जड़ित मुकुट अर्पित किया, जिसकी कीमत लगभग 75 लाख रुपये है। इस भव्य आयोजन का शुभारंभ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने पूजन के साथ किया।
रायपुर के पंडालों में सुबह से देर रात तक भक्तों का तांता लगा रहता है। लाखेनगर चौक की अनोखी पलक झपकाने वाली गणेश प्रतिमा के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे हैं। लोग अपने मोबाइल कैमरों में इस अद्भुत दृश्य को कैद कर रहे हैं, और अब तक लाखों लोग इन वीडियो को देख चुके हैं।
तात्यापारा में धूमकेतु अवतार में बप्पा की स्थापना की गई है, जहां राजवाड़ा किला थीम पर पंडाल सजाया गया है। समता कॉलोनी, आमापारा, रामसागर पारा, जवाहर नगर और मालवीय रोड जैसे क्षेत्रों में भी गणेश प्रतिमाओं को भव्य तरीके से स्थापित किया गया है। बारिश के बावजूद भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ, और उन्होंने ढोल-नगाड़ों के साथ प्रतिमाओं को पंडालों तक पहुंचाया।

गणेश उत्सव अब केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सांस्कृतिक और सामुदायिक एकता का प्रतीक बन चुका है। विभिन्न पंडालों में सांस्कृतिक कार्यक्रम, भक्ति भजनों और नृत्य प्रस्तुतियों का आयोजन किया जा रहा है। सिंधु युवा एकता गणेशोत्सव समिति के सदस्य विशाल नेचवानी ने बताया कि उनके पंडाल की सफलता समिति के 70-75 युवाओं की मेहनत और सामूहिक प्रयास का परिणाम है। हर साल थीम आधारित मूर्तियों की स्थापना की जाती है, जो भक्तों को आकर्षित करती है।


