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Raipur: महाकाल की तर्ज पर बनेगा भोरमदेव कॉरीडोर, छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास को नई दिशा...

Puja Rahi
Raipur: महाकाल की तर्ज पर बनेगा भोरमदेव कॉरीडोर, छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास को नई दिशा...
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Raipur: महाकाल की तर्ज पर बनेगा भोरमदेव कॉरीडोर, छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास को नई दिशा…

रायपुर : छत्तीसगढ़ में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भोरमदेव कॉरीडोर को विकसित करने की योजना तैयार की गई है। महाकाल कॉरिडोर की तर्ज पर बनने वाले इस प्रोजेक्ट पर लगभग 200 करोड़ रुपए खर्च का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही, महाप्रभु वल्लभाचार्य की जन्मस्थली चंपारण के सौंदर्यीकरण के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

भोरमदेव और चंपारण को पर्यटन हब बनाने की योजना

  1. भोरमदेव कॉरीडोर:
    • छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल भोरमदेव को पर्यटन का केंद्र बनाने के लिए इस परियोजना का प्रस्ताव रखा गया है।
    • कॉरीडोर के निर्माण से पर्यटन के साथ स्थानीय रोजगार में वृद्धि की संभावना है।
  2. चंपारण का सौंदर्यीकरण:
    • महाप्रभु वल्लभाचार्य की जन्मस्थली को भव्य और आकर्षक बनाने के लिए सौंदर्यीकरण की योजना बनाई गई है।
    • पर्यटकों के लिए सुविधाओं का विस्तार और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।

उपमुख्यमंत्री ने रखा प्रस्ताव

छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मुलाकात कर इस महत्वाकांक्षी परियोजना का प्रस्ताव रखा। उन्होंने भोरमदेव और चंपारण को स्वदेश दर्शन योजना -2 के तहत शामिल करने के लिए ज्ञापन सौंपा।

छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास के लिए बड़ा कदम

यह परियोजना छत्तीसगढ़ को पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने का प्रयास है।

  • भोरमदेव कॉरीडोर का उद्देश्य राज्य के समृद्ध इतिहास और संस्कृति को उजागर करना है।
  • चंपारण सौंदर्यीकरण धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगा और महाप्रभु वल्लभाचार्य के प्रति श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगा।

स्वदेश दर्शन योजना के तहत प्रस्तावित विकास कार्य

स्वदेश दर्शन योजना -2 के अंतर्गत इस परियोजना को शामिल करने से केंद्रीय सहायता मिलने की उम्मीद है। इससे राज्य में पर्यटन संरचना का विस्तार और उन्नयन होगा।

पर्यटन विकास का असर

  1. राज्य के धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को नई पहचान मिलेगी।
  2. पर्यटन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
  3. रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
  4. छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन मानचित्र पर उभारने में मदद मिलेगी।

छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम राज्य के पर्यटन विकास में मील का पत्थर साबित हो सकता है। भोरमदेव और चंपारण जैसे स्थलों का उन्नयन न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से भी फायदेमंद होगा।


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