PM Modi
PM Modi : निकोसिया : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी तीन देशों की विदेश यात्रा के पहले चरण की शुरुआत साइप्रस से की। यहां पहुंचते ही साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडोलाइड्स ने उनका भव्य स्वागत किया और उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ मकारियोस III’ से नवाज़ा। यह पहली बार है जब किसी भारतीय प्रधानमंत्री को यह सम्मान मिला है और पहली बार पीएम मोदी साइप्रस की आधिकारिक यात्रा पर पहुंचे हैं।
PM Modi : तीन देशों की यात्रा में पहला पड़ाव: साइप्रस
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा साइप्रस, कनाडा और क्रोएशिया तक फैली हुई है। वे कनाडा में G-7 सम्मेलन में भाग लेंगे, जबकि साइप्रस में उनकी यात्रा का केंद्रबिंदु आर्थिक सहयोग, विदेशी निवेश, और रणनीतिक साझेदारी रहा।
PM Modi : भारत बन रहा वैश्विक आर्थिक शक्ति
साइप्रस की राजधानी निकोसिया में आयोजित व्यापारिक गोलमेज बैठक को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा “भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और आने वाले वर्षों में हम तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहे हैं।” उन्होंने अगली पीढ़ी के सुधारों, नीतिगत स्थिरता, और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर जोर दिया और भारत को दुनिया की सबसे तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बताया।

PM Modi : साइप्रस को बताया अहम साझेदार
प्रधानमंत्री ने कहा कि साइप्रस, भारत का एक विश्वसनीय और महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार है, विशेष रूप से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के क्षेत्र में। उन्होंने दोनों देशों के बीच संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प दोहराया।
पीएम मोदी ने निम्न क्षेत्रों में साझेदारी के अवसर गिनाए:
- डिजिटल पेमेंट और इनोवेशन
- हरित विकास और पर्यावरणीय समाधान
- कृत्रिम मेधा (AI), सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी
- बंदरगाह, उड्डयन और शिपिंग
- महत्वपूर्ण खनिज और निर्माण क्षेत्र
PM Modi : भारत में निवेश के लिए खुला माहौल
प्रधानमंत्री ने साइप्रस की कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि भारत ने जीएसटी, कार्पोरेट टैक्स में कटौती, और गैर-अपराधीकरण कानूनों जैसे अनेक सुधार लागू किए हैं। इससे वैश्विक निवेशकों को एक स्थिर, भरोसेमंद और अनुकूल वातावरण मिल रहा है।
PM Modi : मोदी का सम्मान और दृष्टिकोण
सम्मान स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा “यह सम्मान केवल मेरी नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की मेहनत, आकांक्षा और वैश्विक भूमिका की मान्यता है।”
