संविधान पर चर्चा : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संविधान को लेकर एक कार्यक्रम में विपक्ष, खासकर कांग्रेस पार्टी, पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने समय-समय पर संविधान को अपने राजनीतिक फायदे के लिए बदला और उसकी आत्मा को आहत किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने 1951 में हुए पहले संविधान संशोधन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संविधान के आदर्शों के खिलाफ था। उन्होंने बताया कि उस समय राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने पंडित जवाहरलाल नेहरू को चेताया था कि यह कदम गलत है। हालांकि, नेहरू जी ने उनकी बात को अनसुना कर दिया। पीएम मोदी ने कटाक्ष करते हुए कहा,
"पंडित नेहरू का अपना संविधान चलता था, उन्होंने किसी की सलाह नहीं मानी। यह पहला कदम था जब कांग्रेस ने संविधान के साथ छेड़छाड़ शुरू की।"
इंदिरा गांधी और आपातकाल का जिक्र
प्रधानमंत्री ने इंदिरा गांधी के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने सत्ता में बने रहने के लिए आपातकाल के दौरान संविधान में मनमाने संशोधन किए। उन्होंने कहा,
"जो बीज पंडित नेहरू ने बोया था, उसे खाद-पानी देने का काम इंदिरा गांधी ने किया। आपातकाल के दौरान संविधान को पूरी तरह अपने राजनीतिक हितों के लिए बदला गया। यह संविधान की आत्मा पर सबसे बड़ा हमला था।"
कांग्रेस पर गंभीर आरोप
प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने संविधान में बार-बार संशोधन करके उसे कमजोर किया और लोकतंत्र की जड़ों पर प्रहार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए संविधान को सिर्फ एक औजार की तरह इस्तेमाल किया।
भाजपा की प्रतिबद्धता
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी संविधान के आदर्शों और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा केवल उसी पार्टी में हो सकती है जो इसे एक पवित्र दस्तावेज मानती हो।
प्रधानमंत्री का यह बयान कांग्रेस के अतीत की आलोचना के साथ-साथ संविधान के संरक्षण और लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने की उनकी पार्टी की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।