Operation Tiger : 15-15 करोड़ एडवांस लिए गद्दारों को नहीं छोड़ेंगे, उद्धव सेना ने बागी सांसदों को दी चेतावनी
Operation Tiger : मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) में सियासी भूचाल तेज हो गया है। पार्टी के 6 बागी लोकसभा सांसदों पर संजय राउत ने बुधवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जमकर निशाना साधा। राउत ने साफ चेतावनी दी कि गद्दारी करने वालों को इस बार बख्शा नहीं जाएगा।
Operation Tiger : बाला साहेब का स्नेह और उद्धव का प्यार भूल गए
संजय राउत ने कहा कि जिन सांसदों पर बाला साहेब ठाकरे ने बेटे जैसा स्नेह और उद्धव ठाकरे ने भाई जैसा प्यार बरसाया, वही आज पार्टी के साथ गद्दारी कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ये सांसद शिवसेना के मशाल चिह्न और उद्धव ठाकरे की मेहनत पर जीते थे, लेकिन अब जनादेश के साथ विश्वासघात कर रहे हैं।
Operation Tiger : कानूनी लड़ाई शुरू, संसदीय बोर्ड की बैठक बुलाई
राउत ने बताया कि पार्टी ने पहले ही कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। स्पीकर ओम बिरला को पत्र भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि व्हिप जारी किया गया है और संसदीय बोर्ड की बैठक गुरुवार सुबह 11 बजे बुलाई गई है। राउत ने साफ कहा कि अगर बगावत की पुष्टि हुई तो हम उन्हें छोड़ेंगे नहीं।
Operation Tiger : इस्तीफा देकर चुनाव लड़ें
संजय राउत ने बागी सांसदों से नैतिकता का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि अगर पार्टी छोड़नी ही है तो पहले लोकसभा से इस्तीफा दें, फिर जनता के बीच जाकर चुनाव लड़ें और जीतकर दिखाएं। उन्होंने कहा कि वे उद्धव ठाकरे के चेहरे पर जीतकर संसद पहुंचे हैं, इसलिए गद्दारी स्वीकार नहीं की जाएगी।
Operation Tiger : 50 करोड़ का रेट, 15 करोड़ एडवांस का आरोप
राउत ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए दावा किया कि मंगलवार रात उन्हें फोन आया, जिसमें बताया गया कि प्रत्येक सांसद का रेट 50 करोड़ रुपये रखा गया है, जिसमें से 15-15 करोड़ रुपये एडवांस दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि कुछ सांसदों ने बिना एडवांस लिए विमान में बैठने से इनकार कर दिया था।
Operation Tiger : ओमराजे निंबालकर पर दबाव का दावा
राउत ने ओमराजे निंबालकर पर दबाव बनाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनके पिता की हत्या के मामले का फैसला आने वाला है और उन्हें कथित तौर पर संदेश दिया गया कि फैसला पक्ष में चाहिए तो शिंदे गुट का साथ दें।
शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से 6 सांसद बागी हो चुके हैं, जबकि अनिल देसाई, अरविंद सावंत और राजाभाऊ वाजे उद्धव ठाकरे के साथ बचे हैं। इस घटनाक्रम से महाराष्ट्र की राजनीति में नई अस्थिरता पैदा हो गई है।

