Online Fraud : ऑनलाइन ट्रेडिंग फ्रॉड का बड़ा मामला – रायपुर में डिप्टी डायरेक्टर से 90 लाख की ठगी!

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Online Fraud : रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी में ऑनलाइन धोखाधड़ी का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय की डिप्टी डायरेक्टर माया तिवारी को फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए करीब 90 लाख रुपये की ठगी का शिकार बनाया गया। माया तिवारी (61 वर्ष), जो नया रायपुर के सेक्टर 27 की निवासी हैं, ने इस संबंध में राखी थाना में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
फेसबुक विज्ञापन से शुरू हुआ फ्रॉड
माया तिवारी के मुताबिक, 3 मार्च 2025 को उनके फेसबुक पर एक विज्ञापन दिखाई दिया, जिसमें easinegyan.pro नाम की वेबसाइट पर "The Times of India" के समर्थन का दावा करते हुए सरकारी सहयोग से भारी मुनाफे का लालच दिया गया था। विज्ञापन में लिखा था – "Thrive Even in a Crisis! How Revolutionary Technology will Allow You to Earn Over Rs. 1,95,000 a Month with Government Support."
लिंक पर क्लिक करने के बाद उन्हें एक वीडियो दिखाया गया और फिर फ्री रजिस्ट्रेशन के लिए नाम, ईमेल और मोबाइल नंबर मांगा गया। रजिस्ट्रेशन के तुरंत बाद जारा अली खान नाम की एक महिला ने संपर्क किया और BullMarkets नामक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म में निवेश का झांसा दिया।
कई फर्जी अकाउंट मैनेजर शामिल
इसके बाद अनिता शर्मा, सुनीता शर्मा, विग्नेश कुमार (कोच्ची), संजीव कपूर और दक्ष अग्रवाल जैसे अन्य कथित खाता प्रबंधकों ने उनसे अलग-अलग बहानों से निवेश करवाया। 3 मार्च से 23 मई 2025 के बीच RTGS, UPI और IMPS के माध्यम से कुल ₹89,67,855.72 रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवाए गए।
रिटर्न का वादा, लेकिन कोई पैसा नहीं मिला
आरोपियों ने दावा किया कि जुलाई 2025 तक उनकी निवेश राशि दोगुनी हो जाएगी। लेकिन समय बीतने के बावजूद माया तिवारी को कोई रिटर्न नहीं मिला। हैरानी की बात यह है कि अब भी विग्नेश कुमार (कोच्ची) ईमेल और कॉल के माध्यम से माया तिवारी से संपर्क कर रहा है। आरोपी इन ईमेल पतों का उपयोग कर रहे हैं –
पुलिस और साइबर सेल ने शुरू की जांच
माया तिवारी ने अपने सभी लेन-देन के दस्तावेज, आरोपी व्यक्तियों के नाम, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी राखी थाना पुलिस को सौंप दिए हैं। थाना प्रभारी ने बताया कि यह प्रथम दृष्टया एक सुनियोजित ऑनलाइन ठगी का मामला है। पुलिस ने साइबर सेल की मदद से संबंधित बैंक खातों और लेनदेन की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है।


