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महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में राष्ट्रीय आजीविका मिशन सहायक

Uma Verma
महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में राष्ट्रीय आजीविका मिशन सहायक
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महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में राष्ट्रीय आजीविका मिशन सहायक

दुर्ग - महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में राष्ट्रीय आजीविका मिशन सहायक साबित हो रही है। इस योजना की बदौलत समूह की महिलाएं विभिन्न तरह का व्यवसाय कर खुद को आत्मनिर्भर बना रही हैं।

दुर्ग जिले के ग्राम खोपली की आशिता स्व सहायता समूह के महिलाएं सीमेंट से बनने वाले गमले, तुलसी चौरा, फेंसिंग पोल, चोकर टाइल्स आदि उत्पादों का निर्माण कर अच्छा खासा लाभ कमा रही है। इनके द्वारा बनाए गए

इन उत्पादों की दुर्ग भिलाई सहित अन्य जिलों में भी खूब बिक्री होती है। इन महिलाओं ने शासन की योजना का लाभ लेकर अपना व्यवसाय शुरू किया और फिर बैंक से लोन लेकर इन्होंने अपने व्यवसाय को बढ़ाया।

इस व्यवसाय के ज़रिए समूह कि ये महिलाएं आज न सिर्फ अपने पैरों पर खड़ी है बल्कि अपने इस व्यवसाय में अन्य महिलाओं को भी इन्होंने रोजगार दिया हुआ है

ग्राम खोपली निवासी आशिका स्वसहायता समूूह की अध्यक्ष दुरपति काकड़े ने बताया कि स्वसहायता समूह बिहान से जुड़ी हुई हूं। हमारी स्वसहायता समूह का नाम आशिका स्वसहायता समूूह है और मैं इस समूह की अध्यक्ष भी हूं।

समूह की महिलाओं द्वारा गमला, तुलसी चौरा, फैंसिंग पोल व पेवर ब्लाक बनाया जाता है और इसे बनाकर दुर्ग, भिलाई, राजनांदगांव और अभी हाल ही में तुलसी चौरा दंतेवाड़ा गया है। समूह में जुडऩे के बाद प्रचार-प्रसार किए और इसके

लिए मैने जनपद कार्यालय और अधिकारियों से मिलकर इसकी जानकारी दी हूं। साथ ही बड़े-बड़े अधिकारियों का फोन के माध्यम से हमें ऑडर मिलता है। समूह की दीदी को अभी रोजगार मिला है

जिसमें काम कर आय का अच्छा माध्यम है जिसमें हर सप्ताह अच्छी खासी आमदनी होती है जिससे कि वह खुश हैं। समूह की महिलाओं को मैं प्रतिदिन के हिसाब से 200 रुपए देती हूं

आशिता स्व सहायता समूह पूजा देशमुख ने बताया कि मैं 6 सालों से सीता स्वसहायता समूह के जुड़ी हुई हूं। मैं जब से इस समूह में जुड़ी तो मैंने महिलाओं को इकट्ठा कर एक समूह का निर्माण की हूं।

जिसमें बाद आजीविका का साधन हो इसके लिए सभी महिलाओं ने मिलकर 25 रुपए साप्ताहिक समूह में जमा करते गए। इसी कड़ी में हमें सरकार की ओर से 15 हजार रुपए का आर्थिक सहायता प्राप्त हुआ जिससे हमने मोमबत्ती व रुई

बत्ती निर्माण करना शुरू किया। इसी तरह आय का अच्छा साधन मिलते गया और हमने अपनी आजीविका व आर्थिक स्थिति को और बढ़ाने के लिए फैंसिंग पोल, मंदिर, गमला और तुलसी चौरा का निर्माण करना शुरू कर दिया पहले हम

लोग एक गृहणी के रुप में थे घर से कभी बाहर नहीं निकले थे, लेकिन जब से हमने इस समूह में जुड़े हैं। समूह में जुडऩे के बाद प्रचार-प्रसार किए और इसके लिए हम सभी ने जनपद कार्यालय जाकर अधिकारियों से मिलें। साथ ही बड़े-बड़े

अधिकारियों का फोन के माध्यम से हमें ऑडर मिलता है। समूह में जुड़ी महिलाओं को रोजगार मिला है जिसमें काम कर आय का अच्छा माध्यम है जिसमें अच्छी खासी आमदनी होती है

जिससे कि वह खुश हैं और हमारी आर्थिक स्थिति भी सुधर गई है। इस सामानों को बनाने के लिए हमें ढांचा की जरुरत पड़ती है। यह सांचा यहां हमें उपलब्ध नहीं हो

सका तो हमने मिलकर इसे यूपी (बिहार) से मंगवाया गया है। दुर्ग के बिहान बजार में जाकर समूह द्वारा निर्माण किया गया सामानों को बेचते हैं

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व्यापारी ओटेबंद निवासी दिलीप बंजारे ने बताया कि आशिका स्वसहायता समूूह से पिछले दो सालों से जुड़ा हुआ हूं और यहां पर समूह के द्वारा बनाए जाने वाले सामान को विभिन्न जगहों पर ले जाकर बेचता हंू।

मेरा भी अच्छा खासा आमदनी हो जाता है। अभी मैं तुलसी चौरा और गमला लेकर जा रहा हूं। समूह द्वारा फैंसिंग पोल, मंदिर, गमला और तुलसी चौरा का निर्माण किया जाता है।

मैं यह सामान को दल्लीराजहरा, डौंडीलोहारा, संबलपुर, बालोद, करहीभदर क्षेत्र में घूम-घूम कर लोगों को सामान बेचता हूं


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