Narayanpur Naxalite Encounter : कांकेर के नक्सली भी मुठभेड़ में ढेर............

Naxalite Encounter
Naxalite Encounter
Narayanpur Naxalite Encounter : नारायणपुर : अक्टूबर को दंतेवाडा और नारायणपुर के सीमा में ग्राम थुलथुली और गवाडी के जंगलों में सुरक्षाबल के जवानों ने करोड़ों के 31 ईनामी माओवादियों को मुठभेड़ में मार गिराते हुए
एक नया इतिहास दर्ज कर 29 माओंवादियों की शिनाख्त कर ली है....मुठभेड़ में मारे गए 31 में से 29 माओवादियों की शिनाख्त वायरल सूची में कांकेर जिले के तीन ईनामी नक्सलियों का नाम भी सूची शामिल है
जिनका नाम पता सूची में जिले के कोयलीबेडा इलाका बताया गया है....मुठभेड़ में मारे गए वायरल शिनाख्त सूची में कांकेर के जिन माओवादियों की पहचान हुई
उसमें बसंती पति सांकेत पीपीसीएम सदस्या ईनामी 08 लाख निवासी कोयलीबेडा, सोमे पति टुंगे उर्फ़ मानसिंग पीपीसीएम सदस्या ईनामी 08 लाख, निवासी रेकाभाट कोयलीबेडा, सोहन उर्फ़ रोहन पदम एसीएस आमदाई एरिया
कमेटी सदस्य 05 ईनामी निवास्री कुमुरगुण्डा थाना कोयलीबेडा दर्ज है....सबसे बड़े मुठभेड़ में कांकेर जिले के तीन ईनामी मारे जाने की घटना पर जब हमारी टीम ने कोयलीबेडा इलाके में इन माओवादियों के बारे में जानकारी जुटाया
गया तो सिर्फ रेकाभाट कोयलीबेडा सोमे पति टुंगे उर्फ़ मानसिंग के परिजनों का मालूमात हो पाया....मुठभेड़ में मारी गई सोमे पति टुंगे उर्फ़ मानसिंग के बारे उनके परिजनों ने बताया की उसका नाम सोमे उर्फ़ प्रमिला दुग्गा है जो सात
Narayanpur Naxalite Encounter
भाई बहनों में सोमे उर्फ़ प्रमिला सबसे बड़ी बेटी थी जो कक्षा 05 में पढ़ते पढ़ते ही नक्सली संगठन में चली गई जिसके बाद आज मीडिया और सोशल मीडिया से मुठभेड़ में मारे जाने की खबर मिली है....उनके परिजन आगे इस बात का भी
ज़िक्र करते है की अब सोमे उर्फ़ प्रमिला के माता पिता और भाई बहनों को उसका चेहरा भी याद नहीं है नक्सल संगठन से जुड़ने के बाद उसने कभी घर के तरफ मुड़कर नहीं देखा ना.... सोमे उर्फ़ प्रमिला दुग्गा की मुठभेड़ में हुई मौत की
खबर मिलने और शव लाने लेकर आने के सवाल पर माता पिता सहित पूरा परिवार सोमे उर्फ़ प्रमिला के नक्सल संगठन से जुड़ने फैसले का विरोध कर उसके शव घर लाकर दाह संस्कार करने से भी इंकार करते नजर आ रहे है
....जिस नक्सलवाद देश और समाज हिकारत की नजर से देखता है उस नक्सलवाद से जुड़े बेटी के मुठभेड़ में मारे जाने के उसके शव को लेने से
इंकार करना एक अनपढ़ माता पिता ने उन लोगों को भी संदेश दिया है लोकतांत्रिक समाज में हिंसा को कभी स्वीकार्य नहीं किया जा सकता


