MP Tikamgarh News : अयोग्य डॉक्टरों के झोलों में लोगों की जान, बेखौफ हो कर चला रहे अपनी दुकानें....पढ़े पूरी स्टोरी

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MP Tikamgarh News : अयोग्य डॉक्टरों के झोलों में लोगों की जान, टीकमगढ़ में झोलाछाप डॉक्टर बने मौत के सौदागर, प्रशासनिक तंत्र में पहुंच के चलते बेखौफ हो कर चला रहे अपनी दुकानें
संतोष कुशवाहा
टीकमगढ़ : टीकमगढ़ जिले के ग्रामीण इलाकों में इस वक्त झोलाछाप डॉक्टरों का राज चल रहा, कई लोगों की जान लेने बाद भी इन झोलाछाप की दुकानें बेखौफ चल रही जिसपर प्रशासन मूकदर्शक बनकर देख रहा है, लोगों का कहना है की इनकी प्रशासनिक तंत्र अच्छी पकड़ होने के कारण इन पर कोई कार्यवाही नहीं करता है। आइए हम आपको इस खबर में झोलाछाप डॉक्टरों के मौत को तांडव बताते हैं।
झोलाछाप डॉक्टरों के गलत इलाज के कारण होने वाली मौतों के बारे में अगर देखा जाए तो पिछले एक साल में लगभग आधा दर्जन लोगों की जान गई है। पिछले एक साल में ग्राम अमरपुर, भेलसी, कुडिला और बम्होरी समेत कई गांवों में अयोग्य झोलाछाप डॉक्टर द्वारा यमदूत बनकर लोगों की जान ली है।
आश्चर्य की बात यह है की इन पर कोई कार्यवाही नही होती और अगर कभी कभार कार्यवाही हो जाए तो एक सप्ताह के अंदर हरीझंडी दे दी जाती है । इन यमदूतों पर प्रशासन के द्वारा कार्यवाही के नाम पर जनता से मजाक किया जाता है ।
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पिछले एक साल पहले जुलाई 2023 में प्रशासन ने झोलाछाप पर कार्यवाही की थी । जिसमें स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिलामुख्यालय के नजदीकी गांव अनगड़ा, पपौरा सहित कई गावों में कार्यवाही के दौरान कई दुकानों को सील कीया गया था ।
कार्यवाही के दौरान डॉक्टर सिद्धार्थ रावत ने झोलाछाप डॉक्टरों की दुकानों से एलोपैथिक की कई दवाईयां और समान भी पकड़ा था लेकिन कुछ ही दिन में बिभाग द्वारा हरी झंडी दे दी गई और दुकानें द्वारा खुल गईं।
वहीं जिले के कुडीला, चंद्रपुरा, डारगुवां समेत कई गावों में प्रशासन ने कार्यवाही कर दुकानें सील की लेकिन दो पांच दिन में बिभाग द्वारा हरी झंडी दे दी गई और वह फिर से खुल गई।
दुकानों का खुलना कहीं न कहीं झोलाछाप डॉक्टरों और प्रशासन की मिली भगत को साफ दिखता है।
वाइस ओवर 3: जिले में झोलाछाप डॉक्टरों की चलती बेखौफ दुकानों पर आम लोगों में चर्चा है कि सीएमएचओ से लेकर विभाग के अन्य अधिकारियों को झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा मैनेज किया जाता है जिसके चलते प्रशाषन मूकदर्शक बना रहता है और ना ही इनपर कोई कार्यवाही की जाती है और अगर कभी कार्यवाही करना पड़े तो कार्यवाही के नाम पर मामूली खानापूर्ति करदी जाती है


