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MP News : ‘शिव के बिना पंचतत्वों से बना शरीर शव समान’, सोमनाथ ज्योतिर्लिंग कार्यक्रम में बोले सीएम डॉ. मोहन यादव

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MP News : ‘शिव के बिना पंचतत्वों से बना शरीर शव समान’, सोमनाथ ज्योतिर्लिंग कार्यक्रम में बोले सीएम डॉ. मोहन यादव
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MP News : ‘शिव के बिना पंचतत्वों से बना शरीर शव समान’, सोमनाथ ज्योतिर्लिंग कार्यक्रम में बोले सीएम डॉ. मोहन यादव

MP News : भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में आयोजित सोमनाथ ज्योतिर्लिंग दर्शन कार्यक्रम के दौरान सनातन संस्कृति और आस्था को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि पंचतत्वों से बना मानव शरीर तब तक सार्थक नहीं होता, जब तक उसमें शिव तत्व स्थापित न हो। शिव के बिना शरीर केवल शव के समान है।

मुख्यमंत्री रविवार को भोपाल के रविंद्र भवन में आयोजित कार्यक्रम ‘सोमनाथ मंदिर का दर्शन एक हजार साल बाद भोपाल में’ में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि यदि मनुष्य के भीतर शिव की चेतना नहीं है, तो जीवन निष्प्राण हो जाता है।

सनातन संस्कृति पर हमले हुए, लेकिन आस्था नहीं टूटी

सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारत और उसकी आध्यात्मिक परंपराओं पर समय-समय पर आक्रमण हुए, लेकिन सनातन संस्कृति कभी कमजोर नहीं पड़ी। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने हजार साल पहले हमारी आस्था को तोड़ने का प्रयास किया, आज उनका नामोनिशान नहीं है, जबकि हमारी परंपराएं आज भी जीवित और समृद्ध हैं।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सनातन परंपरा ने कभी किसी को नुकसान पहुंचाने की सोच नहीं रखी। उस दौर में कायरतापूर्ण मानसिकता के तहत मंदिरों को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया, लेकिन आज वही धरोहरें पहले से भी अधिक भव्य और सुंदर स्वरूप में हमारे सामने हैं।

राम और शिव भारत की आध्यात्मिक शक्ति के प्रतीक

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भारत की आत्मा राम और शिव की उपस्थिति से सशक्त है। “एक ओर श्रीराम की मुस्कान है और दूसरी ओर शिव की करुणा,” यह भारत की आध्यात्मिक शक्ति को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि महादेव हमें धैर्य, साहस और संतुलन की शक्ति प्रदान करते हैं।

कार्यक्रम के दौरान सीएम डॉ. मोहन यादव ने रुद्र पूजा में भी भाग लिया और प्रदेशवासियों के लिए महादेव से कृपा बनाए रखने की कामना की।

आस्था और संस्कृति से जुड़ने का संदेश

अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ने की आवश्यकता है। सनातन संस्कृति ही भारत की आत्मा है और यही हमारी पहचान को सशक्त बनाती है।


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