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MP News : शिक्षक दिवस पर सीएम डॉ. मोहन यादव ने 14 शिक्षकों को किया सम्मानित, कहा- गुरु का महत्व अतुलनीय

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MP News : भोपाल। शिक्षक दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिक्षकों के लिए बड़ी घोषणा करते हुए उन्हें चौथा क्रमोन्नति वेतनमान देने की सौगात दी। भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह 2025 में उन्होंने कहा कि इस निर्णय से राज्य सरकार पर 117 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा, लेकिन यह शिक्षकों के सम्मान और शिक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। समारोह में 14 उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित भी किया गया।

MP News : शिक्षकों के लिए सरकार की प्रतिबद्धता

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, “शिक्षकों के कल्याण के लिए सरकार हमेशा तत्पर है। चौथा क्रमोन्नति वेतनमान लागू करने से शिक्षकों को आर्थिक रूप से सशक्त करने में मदद मिलेगी। भले ही इस निर्णय से सरकार पर 117 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, लेकिन यह हमें आनंद की अनुभूति देता है।” इस कदम से प्रदेश के हजारों शिक्षकों को लाभ होगा, जिससे उनकी कार्यक्षमता और उत्साह में वृद्धि होगी।

MP News : 14 शिक्षकों का सम्मान

समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 14 शिक्षकों को सम्मानित किया गया। प्रत्येक शिक्षक को 25,000 रुपये की सम्मान निधि, शॉल, श्रीफल और प्रशस्ति पत्र भेंट किया गया। मुख्यमंत्री ने इन शिक्षकों की सराहना करते हुए कहा कि वे समाज के भविष्य को संवारने वाले सच्चे शिल्पकार हैं।

MP News : गुरु की महत्ता पर प्रकाश

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने गुरु की भूमिका को भारतीय संस्कृति और इतिहास के संदर्भ में रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “गुरु का महत्व अतुलनीय है। गुरु विश्वामित्र ने भगवान श्रीराम को राजमहल से निकालकर जंगल में ले जाकर उन्हें जीवन का वास्तविक ज्ञान दिया। उन्होंने न सेना मांगी, न सैनिक, न रथ, क्योंकि गुरु का उद्देश्य भावी राजा को धरती की सच्चाई से जोड़ना था।”

उन्होंने आगे कहा, “राक्षसों का संहार करने के बाद गुरु विश्वामित्र ने श्रीराम को धनुषयज्ञ में ले जाकर उनके जीवन को नई दिशा दी। इसी तरह, भगवान श्रीकृष्ण ने कंस का वध करने के बाद सांदीपनि आश्रम में शिक्षा ग्रहण की। परशुराम जी ने श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र प्रदान किया। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी देश की सुरक्षा के लिए सुदर्शन चक्र की तरह कार्य कर रहे हैं।”

MP News : संस्कार और शिक्षा की धरती

मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक और शैक्षिक विरासत पर गर्व जताते हुए कहा, “यह वही धरती है जहां बालक से शंकराचार्य बने। मशीनें कोई भी बना सकता है, लेकिन संस्कार केवल शिक्षक ही दे सकते हैं। मध्यप्रदेश की यह पवित्र भूमि शिक्षा और संस्कारों का केंद्र रही है।” उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे बच्चों को न केवल ज्ञान दें, बल्कि उन्हें संस्कारवान और राष्ट्र के प्रति समर्पित नागरिक बनाएं।


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