Modi-Merz Meet: अहमदाबाद। German Chancellor Friedrich Merz Gujrat Visit: भारत और जर्मनी के बीच रणनीतिक साझेदारी का एक नया अध्याय आज गुजरात की ऐतिहासिक धरती पर लिखा जा रहा है। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने अहमदाबाद पहुँचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, जिसमें रक्षा और व्यापार मुख्य केंद्र हैं।
Modi-Merz Meet: बता दें कि, चांसलर मर्ज की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। हाल ही में अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने के संकेतों के बीच, भारत अब यूरोप और विशेष रूप से जर्मनी के साथ अपने आर्थिक संबंधों को और अधिक विविधता देना चाहता है।
Modi-Merz Meet: जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज सोमवार को अपनी पहली आधिकारिक एशिया यात्रा के तहत गुजरात के अहमदाबाद पहुंचे। एयरपोर्ट पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके बाद, चांसलर सीधे ऐतिहासिक साबरमती आश्रम पहुंचे, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी अगवानी की। दोनों नेताओं ने साबरमती आश्रम की पुनर्विकास परियोजना की समीक्षा की और महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
Modi-Merz Meet: एक ही कार में सवार होकर पहुंचे साबरमती रिवरफ्रंट
आश्रम के दौरे के बाद, पीएम मोदी और चांसलर मर्ज एक ही कार में सवार होकर साबरमती रिवरफ्रंट पहुंचे। यहाँ उन्होंने ‘अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव 2026’ का उद्घाटन किया और आसमान में उड़ती रंग-बिरंगी पतंगों के बीच सांस्कृतिक कूटनीति का परिचय दिया। साबरमती के तट पर चरखा चलाना और पतंग उत्सव में शामिल होना, भारत की सॉफ्ट पावर और जर्मनी के साथ बढ़ती नजदीकी का एक बड़ा संदेश है।
Modi-Merz Meet: 5 बिलियन यूरो का पनडुब्बी सौदा: रक्षा क्षेत्र में बड़ी छलांग
इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण और रणनीतिक हिस्सा रक्षा सहयोग है। सूत्रों और उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस दौरे के दौरान 5 बिलियन यूरो (लगभग 45,000 करोड़ रुपये से अधिक) के पनडुब्बी सौदे पर अंतिम मुहर लग सकती है। यह परियोजना भारतीय नौसेना की ताकत को कई गुना बढ़ा देगी।
Modi-Merz Meet: इस सौदे के तहत जर्मन कंपनी थिसेनक्रुप (ThyssenKrupp) और भारत के मझगांव डॉक (Mazagon Dock) के बीच छह अत्याधुनिक स्टील्थ पनडुब्बियों की आपूर्ति को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है। इसे ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की अब तक की सबसे बड़ी रक्षा परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है।
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