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Oscar 2027 : मराठी फिल्म ‘गोंधळ’ को भारत की ओर से मिली ऑस्कर एंट्री, महाराष्ट्र की अनोखी परंपरा पर आधारित है कहानी

ऑस्कर 2027 में भारत की आधिकारिक एंट्री के रूप में मराठी फिल्म ‘गोंधळ’ का चयन किया गया है। फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया ने इस फिल्म को सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म श्रेणी के लिए भारत की ओर से भेजने का फैसला किया है।

Oscar 2027 : मराठी फिल्म ‘गोंधळ’ को भारत की ओर से मिली ऑस्कर एंट्री, महाराष्ट्र की अनोखी परंपरा पर आधारित है कहानी
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नई दिल्ली। ऑस्कर 2027 में भारत की आधिकारिक एंट्री के रूप में मराठी फिल्म ‘गोंधळ’ का चयन किया गया है। फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया ने इस फिल्म को सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म श्रेणी के लिए भारत की ओर से भेजने का फैसला किया है। निर्देशक संतोष दवाखरे की यह फिल्म महाराष्ट्र की प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा ‘गोंधळ’ पर आधारित है।

33 फिल्मों को पीछे छोड़कर बनाई जगह

मराठी फिल्म ‘गोंधळ’ ने ऑस्कर 2027 की रेस में शामिल 33 अन्य फिल्मों को पीछे छोड़ते हुए भारत की आधिकारिक एंट्री बनने का गौरव हासिल किया है। फिल्म को ग्रामीण महाराष्ट्र की पृष्ठभूमि, लोक संस्कृति और मनोवैज्ञानिक थ्रिलर के अनोखे मिश्रण के लिए सराहा जा रहा है। फिल्म की कहानी एक रात में होने वाले पारंपरिक गोंधळ अनुष्ठान के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसमें रहस्य, आस्था और मानवीय भावनाओं को जोड़ा गया है।

क्या है महाराष्ट्र की ‘गोंधळ’ परंपरा?

‘गोंधळ’ महाराष्ट्र की सदियों पुरानी भक्ति संगीत और नृत्य परंपरा है। इसे मुख्य रूप से देवी भवानी और लोक देवता खंडोबा की आराधना के लिए आयोजित किया जाता है। इस धार्मिक अनुष्ठान को करने वाले कलाकारों को ‘गोंधळी’ कहा जाता है। गोंधळी कलाकार पारंपरिक वेशभूषा पहनकर संभल और तुंतउने जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ देवी-देवताओं की कथाएं, लोकगीत और भजन प्रस्तुत करते हैं। आमतौर पर विवाह, मुंडन या अन्य शुभ अवसरों पर परिवार की सुख-समृद्धि और आशीर्वाद के लिए इस आयोजन को किया जाता है।

आस्था के साथ संस्कृति और कला का संगम

गोंधळ केवल एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की लोक कला और सामुदायिक परंपरा का प्रतीक माना जाता है। इस अनुष्ठान में पूजा स्थल के बीच दिवटी यानी मशाल जलाई जाती है, जिसे देवी का प्रतीक माना जाता है। रातभर चलने वाले इस आयोजन में कलाकार पौराणिक कथाओं और लोकगाथाओं के माध्यम से देवी-देवताओं का गुणगान करते हैं। सुबह महाआरती के साथ इस परंपरा का समापन होता है, जिसमें परिवार और समाज के लोग शामिल होते हैं।

‘कंतारा’ की तरह लोक संस्कृति को मिलेगी नई पहचान

फिल्म ‘गोंधळ’ की तुलना कन्नड़ फिल्म ‘कंतारा’ से भी की जा रही है, जिसने कर्नाटक की भूत कोला परंपरा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई थी। इसी तरह ‘गोंधळ’ के जरिए महाराष्ट्र की लोक संस्कृति और धार्मिक परंपरा को वैश्विक मंच मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। फिल्म में किशोर कदम, योगेश सोहनी और इशिता देशमुख जैसे कलाकारों ने अभिनय किया है। अब यह फिल्म अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करेगी।

ऑस्कर में भारत की पुरानी उपलब्धियों की परंपरा

इससे पहले भारत की कई चर्चित फिल्मों को ऑस्कर के लिए भेजा जा चुका है। साल 1957 में आई ‘मदर इंडिया’, 1988 की ‘सलाम बॉम्बे’ और 2001 में आई आमिर खान अभिनीत ‘लगान’ भारत की ओर से ऑस्कर में आधिकारिक एंट्री रह चुकी हैं। अब ‘गोंधळ’ इस सूची में शामिल होकर भारतीय सिनेमा और लोक संस्कृति को एक नई पहचान दिलाने की कोशिश करेगी।


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