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Maharashtra : शिंदे नहीं तो कौन?...शिवसेना में डिप्टी सीएम पद के लिए इन 5 नामों की चर्चा तेज....

Maharashtra : शिंदे नहीं तो कौन?...शिवसेना में डिप्टी सीएम पद के लिए इन 5 नामों की चर्चा तेज....
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Maharashtra : शिंदे नहीं तो कौन?…शिवसेना में डिप्टी सीएम पद के लिए इन 5 नामों की चर्चा तेज….

Maharashtra : महाराष्ट्र में शिवसेना के नेतृत्व वाली सरकार में उपमुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चाएं तेज हैं। अगर एकनाथ शिंदे खुद उपमुख्यमंत्री नहीं बनते हैं, तो इस पद के लिए कई प्रमुख नामों पर विचार हो रहा है।

1. श्रीकांत शिंदे

एकनाथ शिंदे के बेटे और कल्याण से सांसद श्रीकांत शिंदे को इस पद का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। शिंदे अपने बेटे को नई जिम्मेदारी देकर पार्टी के अंदरूनी संतुलन को बनाए रखने की कोशिश कर सकते हैं। श्रीकांत का युवा चेहरा और उनके सक्रिय राजनीतिक कार्य उन्हें मजबूत दावेदार बनाते हैं।

2. दादा भुसे

दादा भुसे, जो वर्तमान में एकनाथ शिंदे गुट के प्रमुख नेता हैं, राज्य सरकार में कृषि मंत्री के तौर पर काम कर चुके हैं। उनके प्रशासनिक अनुभव और शिवसेना के प्रति निष्ठा के कारण वह इस पद के लिए मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।

3. उदय सामंत

उदय सामंत भी उपमुख्यमंत्री पद के लिए एक महत्वपूर्ण नाम हैं। वर्तमान में उच्च शिक्षा मंत्री के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे सामंत ने शिंदे गुट को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई है।

4. गुलाबराव पाटिल

शिवसेना के वरिष्ठ नेता और शिंदे गुट के मजबूत स्तंभ गुलाबराव पाटिल ने अपने लंबे राजनीतिक अनुभव से पार्टी में खास जगह बनाई है। वह अपने मजबूत संगठनात्मक कौशल के लिए जाने जाते हैं और उपमुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदारों में से एक हैं।

5. दीपक केसरकर

दीपक केसरकर, जो वर्तमान में स्कूल शिक्षा मंत्री हैं, शिंदे गुट के संयमित और शांत नेता माने जाते हैं। उनकी साफ छवि और प्रशासनिक समझ उन्हें इस पद के लिए एक योग्य विकल्प बनाती है।

6. भरत गोगवले

शिवसेना के वरिष्ठ विधायक और शिंदे गुट के महत्वपूर्ण चेहरे भरत गोगवले भी इस दौड़ में शामिल हैं। पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा और संगठन को मजबूती देने के लिए किए गए काम उनकी उम्मीदवारी को मजबूत करते हैं।

क्या हो सकता है फैसला?

डिप्टी सीएम पद के लिए इन नामों में से किसे चुना जाएगा, यह शिवसेना और भाजपा के अंदरूनी समीकरणों पर निर्भर करता है। एकनाथ शिंदे का यह फैसला न केवल सरकार की स्थिरता को बनाए रखने में मदद करेगा, बल्कि पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच सामंजस्य भी स्थापित करेगा।


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