महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव : "बंटेंगे तो कटेंगे" और "एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे" बने गेम चेंजर
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी और उसके सहयोगियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे “बंटेंगे तो कटेंगे” और “एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे” जैसे नारे चुनावी माहौल में गेम चेंजर साबित हो सकते हैं। इन नारों के माध्यम से हिंदू मतदाताओं का ध्रुवीकरण करने की कोशिश की जा रही है।
नारों का प्रभाव और रणनीति
- बीजेपी नेता, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर रैली में इन नारों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इन नारों को जोर-शोर से दोहराया है।
- इन नारों का उद्देश्य हिंदू मतदाताओं को एकजुट करना और धार्मिक आधार पर वोट बैंक को मजबूत करना है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
- कांग्रेस और महाविकास अघाड़ी (एमवीए) इन नारों को लेकर बीजेपी पर हमलावर हैं।
- पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इन नारों की आलोचना करते हुए कहा कि बीजेपी की स्थिति “फटेंगे” वाली हो गई है।
चुनावी समीकरण
- महाराष्ट्र में मराठा समुदाय सबसे बड़ा मतदाता वर्ग है, जिसे लुभाने की कोशिश दोनों गठबंधन कर रहे हैं।
- बीजेपी ने हर जिले में एक मराठा समुदाय के प्रत्याशी को उतारा है।
- मुस्लिम मतदाताओं के एकजुट होने की आशंका के चलते बीजेपी हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
संभावित परिणाम
- अगर हिंदू मतदाताओं का ध्रुवीकरण हुआ तो इसका सीधा फायदा महायुति (बीजेपी गठबंधन) को हो सकता है।
- एक सर्वे के अनुसार, महायुति को 145-165 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि एमवीए को 106-126 सीटें मिल सकती हैं।
महाराष्ट्र में 20 नवंबर को मतदान होगा और 23 नवंबर को परिणाम घोषित किए जाएंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ये नारे वाकई में गेम चेंजर साबित होते हैं और बीजेपी की वापसी सुनिश्चित करते हैं।
एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे” में छिपा है दलितों और ओबीसी के लिए संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में “एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे” का नारा देकर कांग्रेस के आरक्षण खत्म करने वाले बयान का जवाब दिया। उन्होंने कहा, “अगर लोग अपनी एकता खो देंगे, तो कांग्रेस उनके आरक्षण के लाभ छीन लेगी।”प्रधानमंत्री ने पहली बार इस नारे का इस्तेमाल सरदार पटेल की जयंती पर केवड़िया में किया था।
इसका उद्देश्य अनुसूचित जातियों (एससी), अनुसूचित जनजातियों (एसटी), और अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी) को एकजुट करना था। मोदी के अनुसार, “एकता के बिना सुरक्षा संभव नहीं है।” प्रधानमंत्री मोदी और योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह ओबीसी, एससी, और एसटी के आरक्षण का हिस्सा मुस्लिम समुदाय को देने की योजना बना रही है। भाजपा ने इसे सामाजिक न्याय की राजनीति के साथ हिंदू पहचान को मजबूत करने की योजना के रूप में प्रस्तुत किया है।

