महाकाल गिरी बाबा : नौ वर्षों से हाथ उठाए धर्म और गौ रक्षा के लिए संकल्पित साधु....
उत्तर प्रदेश : प्रयागराज में चल रहे विश्व के सबसे बड़े धार्मिक मेले महाकुंभ में महाकाल गिरी बाबा, जो मध्य प्रदेश से आए हैं, आस्था और तपस्या के अद्भुत उदाहरण बन गए हैं। बाबा ने धर्म और गौ रक्षा के लिए आजीवन संकल्प लिया है और पिछले नौ वर्षों से अपने एक हाथ को लगातार ऊपर उठाए हुए हैं। इस दौरान उन्होंने न तो कभी हाथ नीचे किया और न ही नाखून काटे।
महाकुंभ में बना आकर्षण का केंद्र
महाकाल गिरी बाबा अपने इस हठयोग और तपस्या के कारण महाकुंभ में आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। देशभर से लोग बाबा को देखने और उनकी तपस्या को निहारने आ रहे हैं। बाबा को लोग “हठयोगी बाबा” के नाम से भी जानते हैं।
बाबा का जीवन और साधना
महाकाल गिरी बाबा राजस्थान के जोधपुर के निवासी हैं और पिछले दो दशकों से साधु का जीवन व्यतीत कर रहे हैं। उन्होंने 10-12 वर्ष की आयु में ही घर छोड़ दिया और साधु-संतों के साथ रहकर भगवान शिव की भक्ति में लीन हो गए। बाबा पिछले नौ वर्षों से अपने हाथ में भगवान भोलेनाथ की पिंडी को पकड़कर तपस्या कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह तपस्या उनके लिए कठिन नहीं है क्योंकि यह भगवान की कृपा और साधना से संभव हो पाई है।
लोक कल्याण और सनातन धर्म के लिए तपस्या
बाबा ने बताया कि उनकी तपस्या लोक कल्याण और सनातन धर्म की रक्षा के लिए है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी यह तपस्या उनके पिंडदान के साथ ही पूरी होगी। नौ वर्षों से बाबा ने अपने हाथ के नाखून तक नहीं काटे हैं।
कुंभ मेले में नियमित उपस्थिति
महाकाल गिरी बाबा हर बार कुंभ मेले में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं और अपने संकल्प और तपस्या के साथ धर्म के प्रति अपनी निष्ठा और समर्पण को प्रस्तुत करते हैं। उनका यह हठयोग और तप संपूर्ण श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।
