Madras High Court
Madras High Court: नई दिल्ली: महिलाओं के अधिकारों से जुड़े एक अहम फैसले में मद्रास हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि तीसरी गर्भावस्था के मामलों में भी मातृत्व अवकाश को सीमित नहीं किया जा सकता। अदालत ने तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया कि महिला कर्मचारियों को पहली और दूसरी गर्भावस्था की तरह तीसरी बार भी पूर्ण मातृत्व लाभ प्रदान किया जाए।
यह निर्णय न्यायमूर्ति आर. सुरेश कुमार और न्यायमूर्ति एन. सेंथिल कुमार की खंडपीठ ने 13 मार्च 2026 के उस सरकारी आदेश की समीक्षा करते हुए दिया, जिसमें तीसरी गर्भावस्था के लिए मातृत्व अवकाश को केवल 12 सप्ताह तक सीमित किया गया था। अदालत ने इस आदेश को अनुचित और भेदभावपूर्ण करार दिया।
मामला शाइयी निशा की याचिका से जुड़ा था, जिन्होंने लंबी अवधि के मातृत्व अवकाश की मांग की थी। निचली अदालत द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए आदेश रद्द कर दिया और एक सप्ताह के भीतर उनका आवेदन मंजूर करने का निर्देश दिया।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि हर गर्भावस्था में महिला को समान शारीरिक और मानसिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, इसलिए देखभाल की आवश्यकता भी समान होती है। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा गया कि इस प्रकार की सीमाएं कानून के विरुद्ध हैं और कल्याणकारी राज्य की अवधारणा से मेल नहीं खातीं।
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