नंदवाना राधा रानी मंदिर : 338 वर्ष पुरानी परंपरा, साल में सिर्फ एक बार खुलते है पट; दर्शन के लिए पहुंचते हैं लाखों भक्त
मध्य प्रदेश के विदिशा स्थित नंदवाना क्षेत्र में राधा अष्टमी के पावन अवसर पर प्रसिद्ध राधा रानी मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।

विदिशा। मध्य प्रदेश के विदिशा स्थित नंदवाना क्षेत्र में राधा अष्टमी के पावन अवसर पर प्रसिद्ध राधा रानी मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। 338 साल पुरानी परंपरा के तहत साल में केवल एक दिन होने वाले राधा रानी के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। दोपहर 12:30 बजे भव्य महाआरती के साथ मंदिर के कपाट खोले गए, जिसके बाद दर्शन का सिलसिला शुरू हुआ।
साल में सिर्फ एक दिन होते हैं राधा रानी के दर्शन
राधा रानी मंदिर की विशेष मान्यता है कि यहां पूरे साल मंदिर के पट आम श्रद्धालुओं के लिए बंद रहते हैं और केवल राधा अष्टमी के दिन ही भक्तों को प्रत्यक्ष दर्शन का अवसर मिलता है। इस खास दिन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु विदिशा पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लग गईं। राधा रानी के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में बदल गया।
वृंदावन से विदिशा लाई गई थी प्रतिमा
मंदिर के पुजारी के अनुसार, इस मंदिर का इतिहास करीब 338 साल पुराना है। मान्यता है कि औरंगजेब के शासनकाल के दौरान जब कई मंदिरों और धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाया जा रहा था, तब उनके पूर्वज वृंदावन से राधा रानी की प्रतिमा को सुरक्षित बचाकर विदिशा लेकर आए थे। प्रतिमा को सुरक्षित रखने के लिए उस समय एक छोटी झोपड़ी में स्थापना कर गुप्त रूप से पूजा-अर्चना शुरू की गई। इसी परंपरा के चलते बाद में केवल राधा अष्टमी के दिन ही आम श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति दी जाने लगी।
50 हजार से 1 लाख तक श्रद्धालु पहुंचते हैं दर्शन के लिए
मंदिर की आस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल में केवल एक दिन खुलने वाले इस मंदिर में हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। अनुमान के मुताबिक राधा अष्टमी के दिन करीब 50 हजार से 1 लाख तक भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है कि वे कई वर्षों से लगातार इस विशेष अवसर पर मंदिर पहुंचकर राधा रानी के दर्शन करते आ रहे हैं। कई प्रमुख हस्तियां भी यहां दर्शन कर चुकी हैं।
महाआरती के बाद शुरू हुई दर्शन व्यवस्था
राधा अष्टमी के अवसर पर दोपहर 12:30 बजे विधि-विधान से महाआरती की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के द्वार खोले गए। मंदिर समिति और प्रशासन की ओर से भक्तों की भीड़ को देखते हुए व्यवस्थाएं की गईं, ताकि दर्शन प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सके। 338 साल पुरानी इस धार्मिक परंपरा के कारण विदिशा का यह राधा रानी मंदिर आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।


