Madhav Gadgil passes away: वरिष्ठ पर्यावरणविद माधव गाडगिल का पुणे में निधन, पश्चिमी घाट संरक्षण में निभाई थी अहम भूमिका

Madhav Gadgil passes away: वरिष्ठ पर्यावरणविद माधव गाडगिल का पुणे में निधन, पश्चिमी घाट संरक्षण में निभाई थी अहम भूमिका
Madhav Gadgil passes away: वरिष्ठ पर्यावरणविद माधव गाडगिल का पुणे में निधन, पश्चिमी घाट संरक्षण में निभाई थी अहम भूमिका
Madhav Gadgil passes away: पुणे: देश के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और पश्चिमी घाट संरक्षण के प्रखर पैरोकार माधव गाडगिल का बुधवार देर रात पुणे में निधन हो गया। वह 83 वर्ष के थे और कुछ समय से अस्वस्थ थे। उनके पुत्र सिद्धार्थ गाडगिल ने निधन की पुष्टि करते हुए कहा, “अत्यंत दुख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि मेरे पिता का कल रात निधन हो गया। अंतिम संस्कार आज होगा।”
Madhav Gadgil passes away: माधव गाडगिल ने भारत के जमीनी पर्यावरण आंदोलनों को मजबूती प्रदान की। पश्चिमी घाट में बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के खिलाफ उन्होंने वर्षों पहले चेतावनी दी थी कि इससे भयंकर प्राकृतिक आपदाएं आएंगी। उनकी अध्यक्षता में 2011 में तैयार गाडगिल रिपोर्ट ने पश्चिमी घाट के 75 प्रतिशत क्षेत्र को पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील घोषित करने की सिफारिश की थी, जिसे कई राज्यों ने सख्त मानकर विरोध किया। बाद में कस्तूरीरंगन समिति ने इसे घटाकर 50 प्रतिशत किया, लेकिन आज तक अंतिम अधिसूचना जारी नहीं हुई। केरल के वायनाड जैसे क्षेत्रों में हाल की आपदाओं ने उनकी दूरदर्शिता को साबित किया।
Madhav Gadgil passes away: 2024 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) ने उन्हें ‘चैंपियंस ऑफ द अर्थ’ सम्मान से सम्मानित किया था। हार्वर्ड से पीएचडी प्राप्त गाडगिल ने भारतीय विज्ञान संस्थान में सेंटर फॉर इकोलॉजिकल साइंसेज की स्थापना की और जैव विविधता अधिनियम के मसौदे में योगदान दिया। सात पुस्तकें और 225 से अधिक शोध पत्र लिखने वाले गाडगिल प्रकृति से गहरा जुड़ाव रखते थे। उनकी पत्नी, मानसून वैज्ञानिक सुलोचना गाडगिल का निधन जुलाई 2025 में हुआ था।


