Top
Begin typing your search above and press enter to search.
ब्रेकिंग न्यूज़

कीर्ति नारायण द्विवेदी पंचतत्व में विलीन: बड़े पुत्र डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने दी मुखाग्नि, अंतिम संस्कार में शामिल हुए नरेंद्र सिंह तोमर समेत कई गणमान्य

कीर्ति नारायण द्विवेदी पंचतत्व में विलीन: बड़े पुत्र डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने दी मुखाग्नि, अंतिम संस्कार में शामिल हुए नरेंद्र सिंह तोमर समेत कई गणमान्य
X

कीर्ति नारायण द्विवेदी पंचतत्व में विलीन: बड़े पुत्र डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने दी मुखाग्नि, अंतिम संस्कार में शामिल हुए नरेंद्र सिंह तोमर समेत कई गणमान्य

ग्वालियर। आईएनएच एवं हरिभूमि समाचार पत्र समूह के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी के पूज्य पिताश्री स्वर्गीय कीर्ति नारायण द्विवेदी का अंतिम संस्कार बुधवार को ग्वालियर के लक्ष्मीगंज मुक्तिधाम में अत्यंत श्रद्धा और सम्मान के साथ संपन्न हुआ। नम आंखों के बीच उनके बड़े पुत्र डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने परंपरानुसार मुखाग्नि देकर पितृ कर्तव्य का निर्वहन किया।

अंतिम यात्रा स्वर्गीय द्विवेदी के सिंधी कॉलोनी स्थित निवास से आरंभ हुई, जहाँ सुबह से ही श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा। घर पर सबसे पहले राज्यसभा सांसद अशोक सिंह, भाजपा विधायक मोहन सिंह राठौर सहित अनेक गणमान्य नागरिक पहुंचे और दिवंगत आत्मा को श्रद्धासुमन अर्पित किए।

अंतिम यात्रा में शहरवासियों की बड़ी संख्या शामिल हुई। “राम नाम सत्य है” के गगनभेदी स्वर के बीच उनका शव वाहन जैसे ही मुक्तिधाम पहुंचा, वातावरण भावुक हो उठा।

बड़े पुत्र डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने दी मुखाग्नि, अंतिम संस्कार में शामिल हुए नरेंद्र सिंह तोमर समेत कई गणमान्य

मुक्तिधाम में मप्र विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, भाजपा विधायक मोहन सिंह राठौड़, राज्यसभा सांसद अशोक सिंह, डॉ. ए.एस. भल्ला, पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष भूपेंद्र द्विवेदी, एडवोकेट पवन पाठक, डॉ. अशोक मिश्रा सहित शहर के अनेक वरिष्ठ जन मौजूद रहे।

पारिवारिक सदस्यों में उनके छोटे पुत्र एडवोकेट रवि द्विवेदी तथा परिवार के अन्य सदस्य उपस्थित रहे, जिन्होंने भारी मन से अपने प्रियजन को अंतिम विदाई दी।

श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे वरिष्ठ नेताओं और गणमान्य नागरिकों ने कहा कि स्वर्गीय कीर्ति नारायण द्विवेदी का जीवन सादगी, विनम्रता और निरंतर कर्मशीलता की मिसाल रहा है। वे सदैव लोगों को जोड़ने वाले, मुस्कुराकर हर परिस्थिति का सामना करने वाले और रिश्तों को निभाने वाले व्यक्ति थे। उनके देवलोक गमन को सभी ने एक अपूरणीय क्षति बताया।


Next Story
All Rights Reserved. Copyright @2019