ट्रॉफी लेने से इनकार, फिर नकवी से मुलाकात क्यों? BCCI सचिव सैकिया ने बताया पूरा मामला, बोले- हमारा मकसद था कि...
बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया और उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला की नकवी से मुलाकात चर्चा में रही। कैमरों में दोनों को दुबई स्टेडियम के रॉयल बॉक्स में नकवी से बातचीत करते देखा गया।

दुबई: महिला एशिया कप 2026 के फाइनल के बाद एक बार फिर ट्रॉफी विवाद सामने आया। हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में भारत ने श्रीलंका को 72 रन से हराकर रिकॉर्ड आठवीं बार खिताब जीता। इसके बाद भारतीय टीम ने पाकिस्तान के गृह मंत्री और एसीसी अध्यक्ष मोहसिन नकवी के हाथों से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया।
नकवी से मुलाकात पर उठे सवाल
ट्रॉफी नहीं लेने के फैसले के बीच बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया और उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला की नकवी से मुलाकात चर्चा में रही। कैमरों में दोनों को दुबई स्टेडियम के रॉयल बॉक्स में नकवी से बातचीत करते देखा गया। इसके बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
सैकिया बोले- हमारा मकसद टीम की जीत था
मुलाकात पर सफाई देते हुए सैकिया ने आईएएनएस से कहा, '' ऐसा नहीं है कि हम किसी से नहीं मिलेंगे। मैं टॉस से लेकर मैच खत्म होने तक रॉयल बॉक्स की सीटों पर बाहर बैठा था। मैं पूरे मैच में उसी जगह पर रहा। मैच के दौरान जो भी आया, वहीं मुझसे मिला। कोई मेरे साथ बैठ गया। फिर शुक्ला जी आए और मेरे साथ बैठे। आपने जिस व्यक्ति का जिक्र किया, वह भी डिप्टी चेयरमैन खालिद अल जरूनी साहब के साथ आकर बैठ गया। यह तो एक सामान्य परंपरा है, जब भी कोई आता है तो हम सबसे मिलते हैं और बात करते हैं। हमने सिचुएशन का हल निकाले की कोशिश की लेकिन हमारी कोशिशें कामयाब नहीं हुईं। हमें कोई अफसोस नहीं है। हमारा मकसद यह नहीं था कि ट्रॉफी कौन देगा। हमारा मकसद था कि भारतीय टीम आसानी से जीते और हम उसमें कामयाब रहे।''
महिला टीम ने पुराने फैसले का समर्थन किया
सैकिया ने कहा, ''हमारी पुरुष टीम ने डेढ़ साल पहले एशिया कप जीता था। और अप्रैल 2025 की पहलगाम घटना के बाद से पूरी सिचुएशन बदल गई। उसके बाद देशवासियों का दबाव था कि हमें अपने पड़ोसी देश के साथ कोई रिश्ता नहीं रखना चाहिए और उनके साथ क्रिकेट नहीं खेलना चाहिए। लेकिन हमारी सरकार की पॉलिसी है कि हमें मल्टीनेशनल टूर्नामेंट में हर देश के खिलाफ खेलना होगा। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम हमारे लिए तय की गई हर शर्त मानेंगे। हमारा सैन्य टकराव अभी भी चल रहा है। एक मुख्य लीडर जो हमारे देश के हितों के खिलाफ काम कर रहा है, हम उससे ट्रॉफी नहीं ले सकते। महिला टीम ने पिछले साल पुरुष टीम के फैसले के साथ एकजुटता दिखाई है। इससे हमारी टीम की परफॉर्मेंस पर असर नहीं होता।''


