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Jacob Martin Acquitted: पूर्व भारतीय क्रिकेटर जैकब मार्टिन 22 साल पुराने केस में बरी, कोर्ट ने कहा- सबूत पर्याप्त नहीं

मार्टिन पर आरोप था कि उन्होंने अजवा स्पोर्ट्स क्लब के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को क्रिकेटर बताकर विदेश भेजने की व्यवस्था में भूमिका निभाई।

Jacob Martin Acquitted: पूर्व भारतीय क्रिकेटर जैकब मार्टिन 22 साल पुराने केस में बरी, कोर्ट ने कहा- सबूत पर्याप्त नहीं
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नई दिल्ली। पूर्व भारतीय क्रिकेटर जैकब मार्टिन को करीब 22 साल पुराने फर्जी वीजा और यात्रा दस्तावेज से जुड़े मामले में बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्यों के अभाव में साबित नहीं माना और उन्हें बरी कर दिया। मामले में अभियोजन का आरोप था कि मार्टिन ने एक व्यक्ति को क्रिकेट क्लब के सदस्य के रूप में ब्रिटेन भेजने की व्यवस्था में भूमिका निभाई थी, जिसके बाद उसके दस्तावेजों पर फर्जी इमिग्रेशन स्टांप का मामला सामने आया था।

2003-04 के मामले से जुड़ा था विवाद


अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक, मामला उस व्यक्ति से जुड़ा था जो क्रिकेट टूर के जरिए ब्रिटेन गया था। बाद में उसके पासपोर्ट पर मौजूद यूके इमिग्रेशन स्टांप को फर्जी पाया गया। जांच के दौरान जैकब मार्टिन समेत कई लोगों के खिलाफ साजिश और धोखाधड़ी से जुड़े आरोप लगाए गए थे।

मार्टिन पर आरोप था कि उन्होंने अजवा स्पोर्ट्स क्लब के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को क्रिकेटर बताकर विदेश भेजने की व्यवस्था में भूमिका निभाई। हालांकि, लंबे समय तक चली सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष इस आरोप को ठोस प्रत्यक्ष साक्ष्यों से साबित नहीं कर पाया।

गवाहों के बयानों में सामने आईं कमियां

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मामले के कई महत्वपूर्ण गवाह समय बीतने के कारण घटनाओं को स्पष्ट रूप से याद नहीं कर सके। कुछ गवाहों के बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खाते थे और कई गवाह जैकब मार्टिन की पहचान तक नहीं कर सके।

अदालत ने यह भी पाया कि अजवा स्पोर्ट्स क्लब के स्वामित्व से जुड़ा ऐसा कोई पुख्ता दस्तावेज पेश नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो सके कि मार्टिन उस क्लब के मालिक थे। इसी तरह कथित आर्थिक लेनदेन में भी उनके शामिल होने का भरोसेमंद सबूत अदालत के सामने नहीं रखा जा सका।

कोर्ट ने कहा- मामला अनुमानों पर आधारित नहीं हो सकता

फैसले में अदालत ने माना कि अभियोजन का मामला काफी हद तक बयानों और परिस्थितिजन्य तथ्यों पर आधारित था। लेकिन इन तथ्यों से यह निर्णायक रूप से साबित नहीं हुआ कि जैकब मार्टिन ने फर्जी इमिग्रेशन स्टांप हासिल करने की कथित साजिश में हिस्सा लिया था या इसके लिए कोई भुगतान प्राप्त किया था।

अदालत ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध साक्ष्य आरोपों को संदेह से परे साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इसी आधार पर जैकब मार्टिन को संबंधित धाराओं में दोषमुक्त कर दिया गया।

22 साल तक चला कानूनी संघर्ष

जैकब मार्टिन ने इस मामले में लगातार अपनी भूमिका से इनकार किया था। लंबे समय तक चले मुकदमे का उनके निजी और पेशेवर जीवन पर भी असर पड़ा। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि इस मामले के कारण उन्हें लंबे समय तक तनाव झेलना पड़ा और उनका नाम बिना पर्याप्त आधार के जोड़ा गया। अदालत से बरी होने के बाद उन्होंने इसे अपने जीवन का बड़ा मोड़ बताया और कहा कि उन्हें आखिरकार राहत मिली है।

भारत के लिए खेले थे 10 वनडे

जैकब मार्टिन ने घरेलू क्रिकेट में बड़ौदा, असम और रेलवे का प्रतिनिधित्व किया था। भारतीय क्रिकेट टीम के लिए उन्होंने 10 वनडे मैच खेले, जिनमें 8 पारियों में उनके नाम 158 रन दर्ज हैं।

अंतरराष्ट्रीय करियर छोटा रहा, लेकिन घरेलू क्रिकेट में वह एक जाना-पहचाना नाम रहे। अब 22 साल पुराने इस कानूनी मामले में बरी होने के बाद उनके करियर से जुड़े इस अध्याय का भी अंत हो गया है।

फैसले के बाद मिली बड़ी राहत

जैकब मार्टिन के लिए अदालत का यह फैसला लंबे कानूनी संघर्ष के बाद बड़ी राहत लेकर आया है। अदालत के रिकॉर्ड में अभियोजन के पास उनके खिलाफ पर्याप्त प्रत्यक्ष और विश्वसनीय साक्ष्य नहीं मिलने की बात सामने आई है। अब इस मामले में उनका नाम दोषसिद्धि के बजाय अदालती बरी होने के फैसले के साथ दर्ज होगा।


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