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ISRO: गगनयान मिशन में बड़ी सफलता, ISRO ने पूरा किया इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट, केंद्रीय मंत्री ने दी बधाई

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ISRO: नई दिल्ली: भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान मिशन की तैयारियों के बीच एक बड़ी सफलता हासिल हुई है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (IADT-02) को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह परीक्षण सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में आयोजित किया गया। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस उपलब्धि पर इसरो की टीम को बधाई दी है।

क्या होता है IADT और क्यों है जरूरी

इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (IADT) गगनयान मिशन का एक बेहद महत्वपूर्ण और जटिल चरण है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतरिक्ष यात्रियों को मिशन के बाद सुरक्षित तरीके से पृथ्वी पर वापस लाया जा सके। जब क्रू मॉड्यूल अंतरिक्ष से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है, तब उसकी गति बहुत अधिक होती है। ऐसे में पैराशूट सिस्टम की मदद से उसकी रफ्तार को नियंत्रित किया जाता है, ताकि सुरक्षित लैंडिंग संभव हो सके।

पैराशूट सिस्टम की सफल जांच

IADT-02 परीक्षण के दौरान एक डमी क्रू मॉड्यूल को भारतीय वायुसेना के विमान से ऊंचाई से गिराया गया। इस दौरान यह परखा गया कि पैराशूट सिस्टम सही समय पर और सही क्रम में काम करता है या नहीं। इस सफल परीक्षण से यह साबित हुआ है कि इसरो का रिकवरी सिस्टम भरोसेमंद है और अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित कर सकता है।

10,000 करोड़ के बजट वाला मिशन

गगनयान कार्यक्रम के लिए केंद्र सरकार ने करीब 10,000 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। यह मिशन अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और पहली मानवयुक्त उड़ान 2027 की पहली तिमाही में प्रस्तावित है।

पहले होंगे मानवरहित मिशन

इससे पहले इसरो तीन मानवरहित मिशन संचालित करेगा, जिनमें सभी तकनीकी और सुरक्षा पहलुओं की जांच की जाएगी। वी. नारायणन के अनुसार, इन मिशनों की तैयारियां सुचारू रूप से चल रही हैं, हालांकि कुछ तकनीकी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं।

गगनयान मिशन का उद्देश्य

गगनयान मिशन का लक्ष्य भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट) में भेजना और उन्हें सुरक्षित वापस लाना है। इस मिशन के तहत तीन अंतरिक्ष यात्री करीब 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर तीन दिनों तक अंतरिक्ष में रहेंगे।

भारत के लिए क्यों है खास

इस मिशन की सफलता के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा, जिनके पास मानव अंतरिक्ष उड़ान की क्षमता है। फिलहाल यह उपलब्धि संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीन के पास ही है।

चुने गए गगनयात्री

इस ऐतिहासिक मिशन के लिए भारतीय वायुसेना के चार पायलटों को अंतरिक्ष यात्री के रूप में चुना गया है, प्रशांत बालकृष्णन नायर, अजीत कृष्णन, अंगद प्रताप, शुभांशु शुक्ला ये सभी गगनयात्री विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं और भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन का हिस्सा बनने के लिए तैयार हैं।


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