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भारत से जापान, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के शेयर ट्रेडिंग का रास्ता खुलेगा, 31 मार्च के बाद NSE IX बढ़ाएगा ग्लोबल एक्सेस प्रोवाइडर का दायरा, जानें कैसे होगा सेटलमेंट

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NSE: मुंबई। भारतीय निवेशक जल्द ही भारत में बैठे-बैठे जापान, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के शेयर बाजारों में निवेश कर सकेंगे। NSE International Exchange (एनएसई IX) अपने ग्लोबल एक्सेस प्रोवाइडर (GAP) प्लेटफॉर्म का दायरा बढ़ाने जा रहा है। शुरुआती चरण में इसका फोकस अमेरिकी सिक्योरिटीज पर है, जिसके बाद अन्य विदेशी बाजारों तक पहुंच दी जाएगी।

NSE: इस पहल के तहत एनएसई IX ने कई अंतरराष्ट्रीय ब्रोकर्स के साथ समझौते किए हैं। ग्लोबल एक्सेस प्रोवाइडर (GAP) एक ‘सुपर ब्रोकर’ मॉडल पर आधारित प्लेटफॉर्म है, जो रेजिडेंट भारतीय निवेशकों को विदेशी कंपनियों के शेयर खरीदने और बेचने की सुविधा देता है। इस मॉडल के जरिए निवेशकों को अलग-अलग विदेशी ब्रोकर्स के साथ सीधे जुड़ने की जरूरत नहीं होगी, जिससे निवेश प्रक्रिया सरल हो जाएगी।

NSE: एनएसई IX के एमडी और सीईओ वी. सुब्रमण्यम ने एक इंटरव्यू में कहा कि यह प्लेटफॉर्म भारतीय निवेशकों को जापान, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के प्रमुख बाजारों तक पहुंच प्रदान करेगा। उन्होंने बताया कि अमेरिकी सेगमेंट में ऑपरेशनल स्थिरता आने के बाद अन्य देशों के शेयरों में निवेश की सुविधा शुरू की जाएगी।

NSE: यूरोप में निवेश के लिए निवेशकों को Euronext तक पहुंच दी जाएगी, जो एक मल्टी-कंट्री यूरोपियन स्टॉक एक्सचेंज नेटवर्क है और कई इक्विटी मार्केट्स का संचालन करता है। इस मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, एक्सचेंज की योजना 31 मार्च के बाद अन्य विदेशी बाजारों में निवेश की सुविधा शुरू करने की है।

NSE: T+1 फ्रेमवर्क से होगा तेज सेटलमेंट

इन विदेशी बाजारों में सेटलमेंट साइकिल के लिए T+1 फ्रेमवर्क अपनाया जाएगा। इस व्यवस्था के तहत ट्रेड के अगले कारोबारी दिन ही सेटलमेंट पूरा हो जाएगा। इससे काउंटरपार्टी और सेटलमेंट जोखिम में कमी आएगी तथा निवेशकों को शेयर और फंड का ट्रांसफर तेज़ी से मिल सकेगा। इस पहल के साथ भारतीय निवेशकों के लिए वैश्विक निवेश के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।


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