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DeepSeek AI को भारत-अमेरिका ने किया ब्लॉक, जानें वजह...

Puja Rahi
DeepSeek AI को भारत-अमेरिका ने किया ब्लॉक, जानें वजह...
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DeepSeek AI को भारत-अमेरिका ने किया ब्लॉक, जानें वजह…

DeepSeek AI : चीन द्वारा विकसित एआई मॉडल DeepSeek को लेकर दुनियाभर में विवाद बढ़ता जा रहा है। भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया समेत कई देशों ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया है। इन देशों ने राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी से जुड़ी चिंताओं का हवाला देते हुए DeepSeek AI के उपयोग पर रोक लगाई है।

DeepSeek पर क्यों लगाया गया बैन?

DeepSeek को लेकर सबसे बड़ी चिंता डेटा स्टोरेज और यूजर्स की गोपनीयता को लेकर है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस AI मॉडल के संचालन और डेटा प्रबंधन को लेकर कोई पारदर्शिता नहीं है। सरकारों को संदेह है कि यह संवेदनशील डेटा एकत्र कर सकता है, जिससे किसी भी देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है।

किन देशों ने DeepSeek पर लगाया प्रतिबंध?

DeepSeek AI के खिलाफ सख्त कदम उठाने वाले देशों में शामिल हैं:

  1. अमेरिका: अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि DeepSeek का डेटा स्टोरेज पारदर्शी नहीं है, जिससे यह साइबर हमलों और जासूसी का खतरा पैदा कर सकता है।
  2. भारत: भारत ने सरकारी कार्यालयों में DeepSeek सहित सभी AI टूल्स जैसे ChatGPT के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है।
  3. ऑस्ट्रेलिया: साइबर सुरक्षा दूत एंड्रयू चार्लटन ने DeepSeek पर बैन लगाते हुए कहा कि यह सरकारी सिस्टम को खतरे में डाल सकता है।
  4. दक्षिण कोरिया: दक्षिण कोरियाई एजेंसियों ने भी DeepSeek को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं और इस पर रोक लगा दी है।

DeepSeek को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की चिंताएं

DeepSeek AI पर बैन लगाने वाले देशों का कहना है कि इसका डेटा संग्रहण नीति अस्पष्ट है। AI मॉडल द्वारा उपयोग किए गए डेटा का दुरुपयोग संभावित रूप से साइबर जासूसी, डाटा लीक और राष्ट्रीय सुरक्षा उल्लंघन का कारण बन सकता है।

भारत का AI टूल्स पर सख्त रुख

भारत ने सभी सरकारी कार्यालयों में AI टूल्स के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला DeepSeek के अलावा ChatGPT, Google Gemini और अन्य AI टूल्स के लिए भी लागू किया गया है। भारत सरकार का मानना है कि ये टूल्स संवेदनशील सरकारी डेटा को लीक कर सकते हैं।

क्या DeepSeek का इस्तेमाल आम जनता कर पाएगी?

फिलहाल, DeepSeek पर बैन मुख्य रूप से सरकारी संगठनों और संस्थानों पर लागू है। आम जनता के लिए इस पर कोई स्पष्ट प्रतिबंध नहीं है, लेकिन एक्सपर्ट्स इसे इस्तेमाल करने से बचने की सलाह दे रहे हैं।

DeepSeek AI का भविष्य क्या होगा?

अगर DeepSeek AI को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार डेटा स्टोरेज और प्राइवेसी से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब देना होता है। अन्यथा, इसे और अधिक देशों में प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।

DeepSeek AI पर लगे इन प्रतिबंधों से साफ है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर देश किसी भी तकनीक को बिना जांच के अपनाने को तैयार नहीं हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि DeepSeek AI अपनी पॉलिसी में किस तरह के बदलाव करता है और क्या इसे भविष्य में वैश्विक स्तर पर स्वीकार्यता मिल पाएगी।


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