Gudi Padwa 2026
Gudi Padwa 2026: धर्म डेस्क: चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाने वाला गुड़ी पड़वा हिंदू नववर्ष का आरंभ माना जाता है। यह पर्व विशेष रूप से महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसी दिन से मराठी नववर्ष की शुरुआत होती है, जबकि उत्तर भारत में इसे चैत्र नवरात्रि के पहले दिन के रूप में पूजा और व्रत के साथ मनाया जाता है। घरों को सजाकर और विशेष पूजा-अर्चना करके लोग नई शुरुआत का स्वागत करते हैं।
कब है गुड़ी पड़वा 2026?
हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 19 मार्च 2026 को सुबह 6 बजकर 53 मिनट से शुरू होकर 20 मार्च को सुबह 4 बजकर 53 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर गुड़ी पड़वा का पर्व 19 मार्च 2026, गुरुवार को मनाया जाएगा। इसी दिन से चैत्र नवरात्रि और हिंदू नववर्ष दोनों की शुरुआत होगी।
शुभ मुहूर्त और खरीदारी का महत्व
गुड़ी पड़वा के दिन सूर्योदय के बाद पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है। इस बार सुबह 6:53 बजे से 7:57 बजे तक का समय पूजा के लिए श्रेष्ठ रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन कोई भी कार्य अशुभ नहीं माना जाता, इसलिए घर, वाहन या सोना खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। दक्षिण भारत में यही पर्व ‘उगादी’ के रूप में मनाया जाता है।
-ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:51 से 5:39 बजे तक
-विजय मुहूर्त: दोपहर 2:30 से 3:18 बजे तक
-गोधुली मुहूर्त: शाम 6:29 से 6:53 बजे तक
-निशिता मुहूर्त: रात 12:05 से 12:52 बजे तक
-गुड़ी लगाने और पूजा के लिए विजय या गोधुली मुहूर्त सबसे उत्तम माना जाता है।
क्यों मनाया जाता है गुड़ी पड़वा?
मान्यता है कि भगवान राम के अयोध्या लौटने पर लोगों ने विजय ध्वज (गुड़ी) लगाकर उनकी जीत का उत्सव मनाया था।
सृष्टि की शुरुआत का दिन
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना शुरू की थी, इसलिए इसे सृष्टि का पहला दिन माना जाता है।
समृद्धि और सफलता का प्रतीक
घर के बाहर ऊंचाई पर गुड़ी स्थापित करना बुराई पर अच्छाई की जीत और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
गुड़ी पड़वा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
गुड़ी पड़वा सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि नई शुरुआत, सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का प्रतीक है। यह दिन जीवन में नए संकल्प लेने और खुशहाली की कामना करने का अवसर देता है। इसी दिन से नवरात्रि का पावन पर्व भी शुरू होता है, जो भक्ति और शक्ति आराधना का समय होता है।
कैसे मनाया जाता है गुड़ी पड़वा?
लोग ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करते हैं। इस दिन अभ्यंग स्नान (तेल स्नान) और नीम का सेवन करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
घर की सजावट और सफाई
घर की साफ-सफाई कर उसे फूलों और रंगोली से सजाया जाता है। यह नई शुरुआत और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होता है।
गुड़ी की स्थापना और पूजा
सूर्योदय के बाद शुभ मुहूर्त में घर के बाहर गुड़ी (ध्वज) स्थापित कर विधि-विधान से पूजा की जाती है।
पारंपरिक पहनावा और भोजन
इस दिन लोग पारंपरिक वेशभूषा धारण करते हैं। महिलाएं नौवारी साड़ी पहनती हैं, जबकि पुरुष कुर्ता-पायजामा या धोती-कुर्ता पहनते हैं। घरों में श्रीखंड, पूरन पोली, खीर जैसे व्यंजन बनाए जाते हैं।
गुड़ी पड़वा पर क्या करें?
गुड़ी पड़वा के दिन पूजा-पाठ, दान-पुण्य और सकारात्मक कार्य करना शुभ माना जाता है। नए कपड़े पहनना, घर को सजाना और परिवार के साथ उत्सव मनाना इस दिन का खास हिस्सा होता है।
गुड़ी पड़वा पर क्या न करें?
इस दिन नकारात्मकता, क्रोध और विवाद से दूर रहना चाहिए। किसी का अपमान नहीं करना चाहिए और तामसिक भोजन जैसे मांस, मदिरा, लहसुन-प्याज से परहेज करना चाहिए।
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