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Government of India: इस द्वीप को अपने कंट्रोल में लेगी भारत सरकार, रक्षा कामों के लिए होगा अधिग्रहण

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Government of India: कोच्चि। लक्षद्वीप प्रशासन ने द्वीपसमूह के आबाद द्वीप बित्रा को रक्षा उद्देश्यों के लिए अधिग्रहित करने की योजना बनाई है, लेकिन इस प्रस्ताव ने राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। स्थानीय कांग्रेस सांसद हमदुल्ला सईद ने इस कदम का कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि अधिग्रहण की आड़ में असल मकसद स्थानीय आबादी को वहां से विस्थापित करना है। उन्होंने साफ किया कि वह इस मुद्दे को लेकर सभी राजनीतिक और कानूनी विकल्पों पर विचार करेंगे और आगामी संसद सत्र में इसे जोरशोर से उठाते हुए केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग करेंगे।

हाल ही में जारी की गई एक सरकारी अधिसूचना में राजस्व विभाग ने बित्रा द्वीप के संपूर्ण भू-भाग को केंद्र सरकार की रक्षा और रणनीतिक एजेंसियों के लिए अधिग्रहण करने का प्रस्ताव रखा है। प्रशासन ने यह निर्णय द्वीप की रणनीतिक स्थिति, राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से महत्व और वहां की प्रशासनिक चुनौतियों के आधार पर लिया है। प्रस्ताव के अनुसार, यह अधिग्रहण भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनस्र्थापन अधिनियम, 2013 के तहत किया जाएगा, जिसमें उचित मुआवज़े और पारदर्शिता के प्रावधान शामिल हैं। इसके लिए प्रस्तावित क्षेत्र का 'सामाजिक प्रभाव आकलन' यानी Social Impact Assessment किया जाएगा।

लक्षद्वीप के जिला कलेक्टर शिवम चंद्र के अनुसार, इस प्रक्रिया में ग्राम सभाओं सहित सभी हितधारकों से परामर्श लिया जाएगा और अधिग्रहण के तहत प्रस्तावित क्षेत्र का सर्वेक्षण 11 जुलाई को अधिसूचना जारी होने की तारीख से दो महीने के भीतर पूरा किया जाएगा।

इस पूरे प्रस्ताव पर नाराजगी जाहिर करते हुए सांसद हमदुल्ला सईद ने कहा कि बित्रा द्वीप लक्षद्वीप का सबसे छोटा और कम आबादी वाला द्वीप है, जहां दशकों से स्थायी आबादी रह रही है। उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाया कि वह रक्षा आवश्यकताओं की आड़ में स्थानीय लोगों को जबरन विस्थापित करना चाहता है, जबकि अन्य द्वीपों में पहले से ही रक्षा परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहित की जा चुकी है।

सईद ने प्रशासन की आलोचना करते हुए कहा कि यह निर्णय स्थानीय पंचायतों से परामर्श लिए बिना लिया गया है, जबकि वर्तमान में द्वीपों में स्थानीय स्वशासन तंत्र सक्रिय नहीं हैं। उन्होंने इसे लोकतंत्र और संविधान द्वारा दिए गए नागरिक अधिकारों का खुला उल्लंघन बताया और प्रशासन से इस निर्णय को तुरंत वापस लेने की मांग की।


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