बस्तर में बढ़ती शांति की झलक: पहली बार जगरगुंडा में सड़क मार्ग से पहुंची बोर्ड परीक्षा सामग्री...

बस्तर में बढ़ती शांति की झलक: पहली बार जगरगुंडा में सड़क मार्ग से पहुंची बोर्ड परीक्षा सामग्री…
बस्तर में बढ़ती शांति की झलक: पहली बार जगरगुंडा में सड़क मार्ग से पहुंची बोर्ड परीक्षा सामग्री…
रायपुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर अंचल में शांति स्थापना और सुरक्षा व्यवस्था की मजबूती का एक और सकारात्मक उदाहरण देखने को मिला है। जहां पहले जगरगुंडा जैसे अति संवेदनशील परीक्षा केंद्रों में बोर्ड परीक्षा की गोपनीय सामग्री हेलीकॉप्टर के माध्यम से भेजी जाती थी, वहीं इस बार पहली बार सड़क मार्ग से यह सामग्री सुरक्षित रूप से पहुंचाई गई।
यह सिर्फ प्रशासनिक सफलता नहीं, बल्कि बस्तर में बढ़ती सुरक्षा और शांति की प्रतीक है। माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा मार्च के पहले सप्ताह से आयोजित होने वाली बोर्ड परीक्षाओं के लिए इस बार 18 परीक्षा केंद्रों में गोपनीय सामग्री भेजी गई, जिनमें 15 संवेदनशील और 3 अति संवेदनशील केंद्र घोषित किए गए थे।
बस्तर में बदलते हालात: विकास और विश्वास की नई सुबह
बस्तर के सुदूर इलाकों में वर्षों तक नक्सली गतिविधियां शासन-प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती रही हैं। लेकिन सुरक्षा बलों और प्रशासन के सतत प्रयासों से अब हालात तेजी से बदल रहे हैं।
पहले जहां नक्सली खतरे के चलते जगरगुंडा में हवाई मार्ग से ही आवश्यक सामग्रियां भेजनी पड़ती थीं, वहीं अब सड़क मार्ग से परीक्षा सामग्री का सुरक्षित पहुंचना इस बात का प्रमाण है कि इलाके में कानून व्यवस्था सुदृढ़ हो रही है।
सुरक्षा बलों की तैनाती, सड़कों के विस्तार और प्रशासनिक नियंत्रण के चलते बस्तर अब नई राह पर आगे बढ़ रहा है।
सभी परीक्षा केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा
सभी 18 परीक्षा केंद्रों पर गोपनीय परीक्षा सामग्री को निकटतम पुलिस थानों और चौकियों में सुरक्षित रखा गया है, जिससे परीक्षाओं को सुचारू रूप से संपन्न कराया जा सके।
इस वर्ष हाई स्कूल पाकेला और हाई स्कूल तालनार को दो नए परीक्षा केंद्रों के रूप में जोड़ा गया है। इस पूरे अभियान के दौरान माध्यमिक शिक्षा मंडल रायपुर के अधिकारी मोहम्मद फिरोज, नारायण नेताम, जिला शिक्षा अधिकारी जी.आर. मंडावी, समन्वयक केंद्र प्राचार्य पी. अनिल कुमार समेत अन्य प्रशासनिक अधिकारी और केंद्राध्यक्ष उपस्थित रहे।
बस्तर में शांति और विकास का नया अध्याय
यह उल्लेखनीय उपलब्धि न केवल प्रशासन और सुरक्षा बलों के मजबूत नियंत्रण को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि बस्तर अब धीरे-धीरे नक्सल मुक्त और विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।


