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1975 emergency: NCERT किताब में पहली बार शामिल हुआ 1975 का आपातकाल, कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक में जोड़ा गया चेप्टर, इंदिरा गांधी और जेपी आंदोलन का जिक्र

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1975 emergency: NCERT किताब में पहली बार शामिल हुआ 1975 का आपातकाल, कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक में जोड़ा गया चेप्टर,  इंदिरा गांधी और जेपी आंदोलन का जिक्र
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1975 emergency: नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक में पहली बार वर्ष 1975-77 के आपातकाल को शामिल किया है। स्वतंत्र भारत के लोकतांत्रिक इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण और विवादित अध्यायों में गिने जाने वाले आपातकाल को अब विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम के माध्यम से पढ़ाया जाएगा।

1975 emergency: एनसीईआरटी की नई पुस्तक Understanding Society: India and Beyond में आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई एक बड़ी चुनौती के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह बदलाव ऐसे समय में किया गया है, जब देश आपातकाल लागू होने के 50 वर्ष पूरे होने का साक्षी बन रहा है।

1975 emergency: छात्र पढ़ेंगे आपातकाल के कारण और प्रभाव का विवरण

पुस्तक में बताया गया है कि 1970 के दशक की शुरुआत में बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और सरकार के खिलाफ बढ़ते असंतोष के कारण देशभर में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए थे। इसी पृष्ठभूमि में जून 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने आंतरिक अशांति का हवाला देते हुए राष्ट्रीय आपातकाल लागू किया।

1975 emergency: किताब के अनुसार, आपातकाल के दौरान कई मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे। प्रेस पर सेंसरशिप लागू की गई और अनेक राजनीतिक नेताओं तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। साथ ही लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ने और नागरिक स्वतंत्रताओं पर प्रभाव पड़ने का भी उल्लेख किया गया है।

1975 emergency: जयप्रकाश नारायण के आंदोलन को प्रमुखता

नई पाठ्यपुस्तक में समाजवादी नेता और लोकनायक जयप्रकाश नारायण (जेपी) की भूमिका को भी प्रमुखता से स्थान दिया गया है। पुस्तक में बताया गया है कि उनके नेतृत्व में चले जन आंदोलनों ने विशेष रूप से बिहार और गुजरात में छात्रों तथा आम नागरिकों को संगठित किया।

1975 emergency: एनसीईआरटी के अनुसार, 1977 में आपातकाल समाप्त होने के बाद हुए आम चुनाव में जनता ने मतदान के माध्यम से अपनी राय व्यक्त की। तत्कालीन सत्तारूढ़ सरकार की हार को भारतीय लोकतंत्र की मजबूती और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शक्ति का उदाहरण बताया गया है।

1975 emergency: लोकतंत्र की चुनौतियों से जोड़ा गया अध्याय

पुस्तक में आपातकाल को केवल एक ऐतिहासिक घटना के रूप में नहीं, बल्कि लोकतंत्र की परीक्षा के रूप में प्रस्तुत किया गया है। अध्याय में फेक न्यूज, गलत सूचना, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान, गरीबी, क्षेत्रवाद, जातीय भेदभाव और लैंगिक असमानता जैसी समकालीन चुनौतियों पर भी चर्चा की गई है।

1975 emergency: Democracy and You सेक्शन जोड़ा गया

एनसीईआरटी ने पहली बार Democracy and You नाम से एक नया सेक्शन भी शामिल किया है। इसका उद्देश्य छात्रों को लोकतंत्र, संविधान और नागरिक जिम्मेदारियों की व्यावहारिक समझ प्रदान करना है। यह खंड विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक मूल्यों, नागरिक सहभागिता और संवैधानिक अधिकारों के महत्व से परिचित कराएगा।

1975 emergency: मीडिया को बताया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ

नई सामाजिक विज्ञान पुस्तक में मीडिया की भूमिका पर भी विशेष अध्याय शामिल किया गया है। इसमें मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बताते हुए कहा गया है कि वह सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने और जनता की आवाज को लोकतांत्रिक मंच तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

1975 emergency: छात्रों को मिलेगा लोकतंत्र की समझ का अवसर

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में आपातकाल को शामिल किए जाने से छात्रों को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास, संविधान की शक्ति और नागरिक अधिकारों के महत्व को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिलेगा। साथ ही यह अध्याय लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका और उनके संरक्षण की आवश्यकता पर भी प्रकाश डालेगा।


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