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Education Act-2025: स्कूलों की मनमानी फीस पर कंट्रोल के लिए नया कानून, कैबिनेट से पास हुआ शिक्षा एक्ट-2025

Dev Verma
CM Rekha gupta
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CM Rekha gupta

Education Act-2025: नई दिल्ली : दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि पर रोक लगाने का ऐलान किया। दिल्ली कैबिनेट ने दिल्ली स्कूल एजुकेशन (ट्रांसपेरेंसी इन फिक्सेशन एंड रेगुलेशन ऑफ फीस) एक्ट-2025 के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी है। इस कानून के ज़रिए अब स्कूलों को मनमानी फीस वसूलने से रोका जाएगा और फीस निर्धारण में पारदर्शिता लाई जाएगी।

Education Act-2025: फीस पर नियंत्रण, पारदर्शिता पर ज़ोर

मुख्यमंत्री ने सचिवालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह ड्राफ्ट राजधानी के अभिभावकों की लगातार शिकायतों और स्कूल फीस में अत्यधिक वृद्धि को देखते हुए तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि इसे जल्द ही विधानसभा की विशेष बैठक में पेश कर कानूनी रूप दिया जाएगा।

Education Act-2025: कानून के प्रमुख प्रावधान

  • कोई भी स्कूल बिना उचित प्रक्रिया के मनमाने ढंग से फीस नहीं बढ़ा सकेगा।

  • कानून तोड़ने वाले स्कूल पर ₹1 लाख से ₹10 लाख तक का जुर्माना लगाया जाएगा।

  • शिक्षा निदेशालय को ऐसे स्कूल की मान्यता रद्द करने और प्रबंधन अपने अधीन लेने का अधिकार होगा।

  • फीस न देने पर छात्रों को कक्षा से बाहर बैठाने पर भी सख्त कार्रवाई होगी।

Education Act-2025: 970 स्कूलों का निरीक्षण, 150 को नोटिस

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि सरकार ने फीस मुद्दे पर एक मिशन के तहत कार्य किया है। अब तक 970 स्कूलों का निरीक्षण किया गया है, जिसमें से 150 से अधिक स्कूलों को फीस वृद्धि पर नोटिस जारी किए गए हैं। रेखा गुप्ता ने आरोप लगाया कि पिछले 27 वर्षों तक सरकारों ने इस गंभीर मुद्दे की अनदेखी की, लेकिन उनकी सरकार ने महज 65 दिनों में यह ठोस कदम उठाया है।

Delhi में प्राइवेट स्कूलों के फीस बढ़ोतरी पर सरकार का एक्शन, 11 निजी  विद्यालयों को भेजा नोटिस - Government takes action on fee hike by private  schools in Delhi, notice sent to

Education Act-2025: जांच के बाद बनाई गई रिपोर्ट और ऑडिट

हाल ही में दिल्ली के कई निजी स्कूलों में मनमानी फीस बढ़ोतरी और छात्रों को स्कूल से निकालने की शिकायतें सामने आई थीं। इन मामलों पर संज्ञान लेते हुए सरकार ने संबंधित स्कूलों की जांच जिला डिप्टी कमिश्नर के माध्यम से करवाई। जांच के बाद विस्तृत रिपोर्ट बनाई गई और स्कूलों का ऑडिट कराया गया।


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