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Diwali 2024 : कुम्हारों की परंपरा और नई चुनौतियाँ....

Uma Verma
Diwali 2024 : कुम्हारों की परंपरा और नई चुनौतियाँ....
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Diwali 2024 : कुम्हारों की परंपरा और नई चुनौतियाँ….

Diwali 2024 : हरदोई : दीप पर्व दीपावली नजदीक आ चुकी है। ऐसे मेें दूसरों के घरों को रोशन करने के साथ ही अपने घर भी खुशियां लाने की उम्मीदों से कुम्हारों का चाक घूमना शुरू हो गया है।

एक जमाना था जब दीपों का त्योहार दीपावली आती थी तो कुमहरों की दिनचर्या ही बदल जाती थी। दीपावली आने से महीनों पहले कुम्हार पूरे परिवार के साथ मिलकर दीये तैयार करने में जुट जाते थे।

कुम्हारों को साल भर रोशनी के पर्व का इंतजार रहता था। लेकिन अब ऐसा नहीं है, कुम्हारों की नई पीढ़ी इस धंधे से मुंह मोड़ रही है।

बावन ब्लाक के ग्राम सराय में 10 कुम्हारों के परिवार रहते हैं। कुम्हारों का कहना है कि अब बाबा-दादा के समय वाला उत्साह नहीं रहा। महंगाई बढ़ गई है और लोगों को भी अब सिर्फ त्योहार पर ही थोड़ी बहुत इस कला की याद आती है।

Diwali 2024

कुम्हार आज भी 30 से 40 रुपये सैकड़ा दिये बेच रहे हैं जबकि लोग मॉल और दुकानों से महंगे दिये खरीद लेते हैं। कुम्हारी कला के हुनरमंदों की माने तो अब सिर्फ परंपरा के रूप में परिवार ये हुनर ढो रहे हैं।

माटी कला योजना को सुनकर उनके अंदर कुछ उत्साह जगा था लेकिन उसमें भी हाथ खाली रहे। ऐसे में उनके चाक घूम तो रहे हैं पर महंगी मिट्टी व ईंधन के कारण मजदूरी भी नहीं मिल पा रही है।

दीपावली में दूसरों के घरों को रोशनी से जगमग करने वाले कुम्हारों की जिदगी मे आज भी अंधेरा ही अंधेरा है। आधुनिकता की चकाचौंध ने कुम्हारों के सामने जीवन यापन का संकट खड़ा कर दिया है।

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हाड़तोड़ मेहनत व अपनी कला के चलते मिट्टी के दीये व दूसरे बर्तन बनाने वाले कुम्हारों को आज दो वक्त की रोटी के लिए परेशान होना पड़ रहा है। कुछ साल पहले तक दीवाली के समय कुम्हार दम भरने का समय नहीं होता था

वहीं आज मिट्टी के चंद दीये बना आस-पास के बाजार में बेचने के लिए जाते है, वहां भी पूरे दीये बिक जाये इस पर संशय बनी रहती है। रंग -बिरंगी बिजली के झालरों ने लिया मिट्टी के दीया बाजार मे दीयों की जगह तमाम रंग बिरंगी

बिजली की झालरों ने ले लिया है। मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कुम्हारों के सामने समस्या मुंह बाए खड़ी है। दीये व दूसरे बर्तन बनाने के लिए कुम्हार को मिट्टी भी महंगा खरीदना पर रहा है।


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