Top
Begin typing your search above and press enter to search.
ब्रेकिंग न्यूज़

Ganpati Visarjan 2026: सूतक या पातक के बीच कैसे करें गणपति विसर्जन? जानिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नियम

साल 2026 में गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर को मनाया गया। गणेश उत्सव का मुख्य समापन 25 सितंबर, शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी के दिन होगा। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु गणपति बप्पा की प्रतिमा का विसर्जन कर उन्हें विदाई देंगे।

Ganpati Visarjan 2026: सूतक या पातक के बीच कैसे करें गणपति विसर्जन? जानिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नियम
X

नई दिल्ली। गणेश उत्सव के दौरान कई घरों में भगवान गणेश की स्थापना कर विधि-विधान से पूजा की जाती है। लेकिन कई बार उत्सव के बीच परिवार में किसी बच्चे का जन्म या किसी सदस्य के निधन जैसी परिस्थितियां आ जाती हैं। धार्मिक परंपराओं में ऐसी स्थिति को सूतक या पातक से जोड़ा जाता है।

ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या इस दौरान गणपति बप्पा की पूजा और विसर्जन किया जा सकता है? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसी परिस्थितियों में कुछ विशेष नियमों का पालन करने की परंपरा बताई गई है।

25 सितंबर को होगा गणपति विसर्जन

साल 2026 में गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर को मनाया गया। गणेश उत्सव का मुख्य समापन 25 सितंबर, शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी के दिन होगा। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु गणपति बप्पा की प्रतिमा का विसर्जन कर उन्हें विदाई देंगे।

क्या होता है सूतक और पातक?

हिंदू धार्मिक परंपराओं में परिवार में बच्चे के जन्म के बाद कुछ समय की अवधि को सूतक कहा जाता है। वहीं परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु के बाद की अवधि को पातक या मृत्यु संबंधी अशुद्धि माना जाता है।

मान्यताओं के अनुसार इस दौरान कई परिवार पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों से दूरी रखते हैं। हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में इसके नियमों में अंतर भी देखने को मिलता है।

सूतक या पातक में कैसे करें गणपति विसर्जन?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि गणेश उत्सव के दौरान घर में सूतक या पातक लग जाए तो प्रभावित व्यक्ति द्वारा प्रतिमा को स्पर्श करने और पूजा करने से बचने की परंपरा बताई जाती है।

ऐसी स्थिति में परिवार का कोई अन्य सदस्य, रिश्तेदार या ऐसा व्यक्ति जिस पर सूतक या पातक लागू नहीं है, गणपति की उत्तर पूजा और विसर्जन की प्रक्रिया पूरी कर सकता है। इस दौरान श्रद्धा और सम्मान के साथ गणपति बप्पा की विदाई करने पर जोर दिया जाता है।

बिना बड़े अनुष्ठान के भी कर सकते हैं विदाई

अगर घर में ऐसी परिस्थिति बन जाए कि परिवार का कोई सदस्य पूजा या विसर्जन में शामिल न हो सके, तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बड़े आयोजन की अनिवार्यता नहीं मानी जाती।

ऐसे समय में भगवान गणेश से मन ही मन प्रार्थना कर, श्रद्धा और विश्वास के साथ बप्पा को विदाई दी जा सकती है। विसर्जन की जिम्मेदारी लेने वाला व्यक्ति अपनी परंपरा के अनुसार पूजा कर प्रतिमा को विसर्जन स्थल तक ले जा सकता है।

परिवार की सुख-शांति के लिए करें प्रार्थना

मान्यताओं के अनुसार सूतक या पातक की स्थिति में भी गणपति बप्पा के प्रति आस्था और सम्मान बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। परिवार के सदस्य दूर रहकर भी भगवान गणेश का स्मरण कर सकते हैं और परिवार की सुख-शांति की कामना कर सकते हैं।


Next Story
All Rights Reserved. Copyright @2019