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कौन हैं गादी आइजेनकोट? बेटे और दो भतीजों को युद्ध में खोया, अब नेतन्याहू को देंगे चुनौती

गादी आइजेनकोट इजरायल के पूर्व सेना प्रमुख हैं। राष्ट्रपति ने उन्हें सरकार बनाने का मौका दिया है। जानिए उनका सैन्य करियर, परिवार और राजनीतिक एजेंडा।

कौन हैं गादी आइजेनकोट? बेटे और दो भतीजों को युद्ध में खोया, अब नेतन्याहू को देंगे चुनौती
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नई दिल्ली: एक सैनिक के रूप में करियर शुरू करने वाले गादी आइजेनकोट अब इजरायल की राजनीति में सबसे अहम चेहरों में शामिल हो गए हैं। उनके बेटे और दो भतीजों की गाजा युद्ध में मौत हो चुकी है। अब वही आइजेनकोट प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सत्ता से हटाने की चुनौती के साथ आगे बढ़ रहे हैं। राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने 7 नवंबर को उन्हें नई सरकार बनाने की जिम्मेदारी देने का फैसला किया।

41 साल सेना में रहे, 2019 में हुए रिटायर

66 वर्षीय आइजेनकोट का जन्म 19 मई 1960 को तिबेरियास में हुआ था। उनका परिवार मोरक्को से आया यहूदी प्रवासी परिवार था। उन्होंने 1978 में गोलानी ब्रिगेड में भर्ती होकर सेना में सफर शुरू किया।

इस दौरान उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं। वह गोलानी ब्रिगेड के कमांडर, उत्तरी कमान के प्रमुख और सेना के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ रहे। 16 फरवरी 2015 को नेतन्याहू ने उन्हें सेना प्रमुख नियुक्त किया। 2015 से 2019 तक उन्होंने इस पद पर काम किया।

बेटे और दो भतीजों को खोया

दिसंबर 2023 में गाजा में सैन्य अभियान के दौरान उनके बेटे गाल आइजेनकोट की मौत हो गई। उनके दो भतीजे भी युद्ध में मारे गए। इसके बावजूद उन्होंने राजनीति में सक्रिय भूमिका जारी रखी।

अप्रैल 2026 में उन्होंने एक लेख में कहा था, "गाल की कब्र पर मैंने कसम खाई थी कि उसने और उसके दोस्तों ने जो कीमत चुकाई है, चाहे वे उन्हें जानते थे या नहीं, वह व्यर्थ नहीं जाएगी।"

नेतन्याहू के साथ काम किया, फिर बने विरोधी

2022 में आइजेनकोट ने बेनी गैंट्ज की नेशनल यूनिटी पार्टी के साथ राजनीति शुरू की। सितंबर 2025 में उन्होंने याशर पार्टी बनाई। जून 2024 में वह और गैंट्ज नेतन्याहू की सरकार से अलग हो गए थे। उन्होंने युद्ध की स्पष्ट रणनीति नहीं होने और सुरक्षा चूकों की जांच न कराने पर सरकार की आलोचना की।


अब राष्ट्रपति ने उन्हें सरकार बनाने के लिए 28 दिन दिए हैं। चुनाव में उनके सहयोगी दलों को 48 और नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिली थीं। दो अरब दलों के समर्थन से उन्हें राष्ट्रपति के सामने 67 सांसदों का समर्थन मिला। हालांकि, इन दलों का समर्थन सरकार में शामिल होने की अंतिम सहमति नहीं है।


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