UGC नियमों पर विवाद के बीच केंद्र का बड़ा कदम, समीक्षा के लिए कमेटी बनाने पर विचार; सुप्रीम कोर्ट में 4 हफ्ते बाद सुनवाई
UGC के नए इक्विटी नियमों पर विवाद के बीच केंद्र सरकार समीक्षा के लिए कमेटी बनाने पर विचार कर रही है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चार सप्ताह के लिए टली। अब सभी वर्गों के छात्रों के हितों को ध्यान में रखकर नियमों की समीक्षा होगी।

UGC Equity Regulations 2026: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए इक्विटी नियमों को लेकर जारी विवाद के बीच केंद्र सरकार एक बार फिर इनके प्रावधानों की समीक्षा करने की तैयारी में है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र ने बताया कि वह नियमों की समीक्षा के लिए एक कमेटी गठित करने पर विचार कर रहा है। सरकार का कहना है कि ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिससे उच्च शिक्षण संस्थानों में किसी भी वर्ग के छात्र को असंतोष या भेदभाव की आशंका न रहे। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद तय की है।
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि सरकार इस पूरे मुद्दे पर विचार कर रही है और नियमों की समीक्षा के लिए कमेटी बनाने की संभावना पर भी मंथन किया जा रहा है।
तुषार मेहता ने कहा कि सरकार का उद्देश्य सभी छात्रों के हितों की रक्षा करना है। नियम तैयार करते समय इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि किसी भी वर्ग के विद्यार्थी को अपने साथ अन्याय होने की आशंका महसूस न हो। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने भी कहा कि सभी छात्रों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।
क्या हैं UGC के नए इक्विटी नियम?
UGC ने जनवरी 2026 में उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने और जातिगत भेदभाव रोकने के उद्देश्य से Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 अधिसूचित किए थे। इन नियमों के जरिए कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में भेदभाव की शिकायतों के निपटारे और छात्रों को समान अवसर उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत करने की कोशिश की गई थी। इन नियमों ने 2012 के पुराने इक्विटी नियमों की जगह ली थी।
हालांकि, नए नियमों में जातिगत भेदभाव की परिभाषा को लेकर विवाद शुरू हो गया। Regulation 3(1)(c) में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के सदस्यों के साथ होने वाले अनुचित व्यवहार को जाति आधारित भेदभाव के दायरे में शामिल किया गया था।
नियमों का विरोध कर रहे याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इसमें सामान्य वर्ग के छात्रों के हितों की पर्याप्त सुरक्षा नहीं की गई है। उनका तर्क है कि प्रावधानों की मौजूदा परिभाषा एकतरफा हो सकती है और इससे अन्य वर्गों के विद्यार्थियों के साथ भेदभाव की आशंका पैदा हो सकती है। दूसरी ओर, नियमों के समर्थकों का मानना है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए प्रभावी और सख्त व्यवस्था जरूरी है।
जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी रोक
नए इक्विटी नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की थी। उस दौरान अदालत ने प्रथम दृष्टया नियमों की भाषा को अस्पष्ट बताते हुए उनके दुरुपयोग की आशंका जताई थी। इसके बाद कोर्ट ने UGC के 2026 के नए नियमों पर अंतरिम रोक लगा दी थी।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि फिलहाल 2012 के पुराने नियम लागू रहेंगे। ऐसे में उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता और भेदभाव से जुड़ी शिकायतों के लिए अभी पुराना नियामकीय ढांचा ही प्रभावी है।
केंद्र सरकार ने अगस्त 2026 में भी सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि नए नियमों पर दोबारा विचार किया जा रहा है। अब 5 नवंबर को हुई सुनवाई में सरकार ने समीक्षा के लिए कमेटी गठित करने पर विचार की जानकारी दी है।
रोहित वेमुला और पायल तड़वी की माताओं की याचिका से जुड़ा मामला
यह मामला अबेदा सलीम तड़वी बनाम भारत संघ और इससे जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सामने आया। वर्ष 2019 में रोहित वेमुला और पायल तड़वी की माताओं ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था की मांग करते हुए याचिका दायर की थी।
दोनों छात्रों की मौत आत्महत्या से हुई थी। उनके परिवारों ने आरोप लगाया था कि उन्हें अपने शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ा। इन घटनाओं के बाद कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में भेदभाव रोकने तथा शिकायतों के समाधान के लिए मजबूत व्यवस्था बनाने की मांग उठी थी।
इसी व्यापक मुद्दे पर विचार के बाद UGC ने जनवरी 2026 में नए इक्विटी नियम अधिसूचित किए थे। हालांकि, इनके कुछ प्रावधानों और परिभाषाओं को लेकर विवाद खड़ा हो गया और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया।
चार सप्ताह बाद फिर होगी सुनवाई
गुरुवार की सुनवाई में केंद्र सरकार ने नियमों की समीक्षा के लिए कमेटी गठित करने पर विचार करने की जानकारी दी। सरकार का जोर ऐसी व्यवस्था बनाने पर है, जिसमें सभी वर्गों के विद्यार्थियों के अधिकार और हित सुरक्षित रहें।


