Top
Begin typing your search above and press enter to search.
ब्रेकिंग न्यूज़

UPI पर MDR को लेकर शिवसेना UBT का केंद्र पर हमला: ‘सामना’ ने 0.4% शुल्क को बताया ‘शब्दों का खेल’

UPI पर MDR को लेकर शिवसेना UBT का हमला

UPI पर MDR को लेकर शिवसेना UBT का केंद्र पर हमला: ‘सामना’ ने 0.4% शुल्क को बताया ‘शब्दों का खेल’
X

मुंबई: शिवसेना (यूबीटी) ने UPI लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने के फैसले को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी के मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में 2,000 रुपए से अधिक के चुनिंदा UPI मर्चेंट लेन-देन पर 0.4% MDR लगाने के फैसले को ‘शब्दों का खेल’ बताया गया है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होनी है।

'व्यापारी पर शुल्क, बोझ जनता पर पड़ेगा'

शिवसेना (यूबीटी) ने सरकार के उस दावे पर सवाल उठाया है कि MDR का भुगतान व्यापारी करेंगे और ग्राहकों पर इसका असर नहीं पड़ेगा। संपादकीय में तर्क दिया गया कि व्यापारी अतिरिक्त खर्च का बोझ ग्राहकों पर डाल सकते हैं। हालांकि, सरकार ने बैंकों और पेमेंट कंपनियों को MDR ग्राहकों से वसूलने से रोकने की बात कही है।

विदेशी कंपनियों को फायदा पहुंचाने का आरोप

'सामना' ने आरोप लगाया कि भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम वीजा और मास्टरकार्ड जैसी अमेरिकी कंपनियों के हित में जा रहा है। पार्टी ने इसे भारतीय मध्यम वर्ग और छोटे व्यापारियों की कीमत पर अमेरिकी अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंचाने वाली व्यवस्था बताया है। ये आरोप शिवसेना (यूबीटी) के संपादकीय में लगाए गए हैं।

मोदी सरकार की विदेश नीति पर भी सवाल

उद्धव ठाकरे गुट ने UPI के मुद्दे को विदेश नीति से भी जोड़ा। संपादकीय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर अमेरिकी दबाव के आगे झुकने का आरोप लगाया गया। इसमें ईरान से कच्चे तेल की खरीद, अमेरिकी व्यापार शुल्क और ट्रंप प्रशासन की कथित कूटनीतिक मांगों का जिक्र किया गया है।

'भारतीय नेताओं को कितना पैसा मिलेगा, जांच हो'

संपादकीय में लिखा गया है, "यूपीआई पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाने का फैसला केवल अमेरिकी फिनटेक कंपनियों को खुश करने के लिए किया गया है। इस बात की जांच होनी चाहिए कि इन कंपनियों से भारतीय नेताओं और उनके बच्चों को रोजाना कितने हजार करोड़ रुपये मिलेगा। इससे साफ है कि अमेरिका को मिलने वाली इस वसूली में भारतीय दलालों का भी हिस्सा होगा। यह राष्ट्रसेवा का नया रूप है, जिसके लिए देश के आम नागरिकों और छोटे व्यापारियों की बलि चढ़ा दी गई है।"

सरकार की 'विश्वगुरु' छवि पर निशाना

शिवसेना (यूबीटी) ने सरकार की 'विश्वगुरु' वाली छवि पर भी सवाल उठाए। 'सामना' के संपादकीय में कहा गया कि सरकार विदेशों में UPI के विस्तार का जश्न मनाती है, लेकिन देश में डिजिटल भुगतान पर शुल्क की व्यवस्था लाई जा रही है। पार्टी ने नोटबंदी, GST, महंगाई और UPI MDR को लेकर सरकार पर कामकाजी वर्ग पर बोझ बढ़ाने का आरोप लगाया है।

सरकार का पक्ष: ग्राहक से नहीं लिया जाएगा MDR

सरकारी जानकारी के मुताबिक, 2,000 रुपए तक के मर्चेंट UPI भुगतान और छोटे व्यापारियों के दायरे में आने वाले लेन-देन पर MDR नहीं लगेगा। सरकार के अनुसार करीब 96% P2M UPI लेन-देन इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे। वहीं व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) UPI ट्रांजैक्शन किसी भी राशि पर मुफ्त रहेंगे।


Next Story
All Rights Reserved. Copyright @2019