Nashik-Trimbakeshwar Kumbh Mela 2026-28: नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ का आगाज, आखिर 21 महीने तक क्यों चलेगा कुंभ मेला? जानें अमृत स्नान की तारीखें
नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेले की शुरुआत 31 अक्टूबर 2026 को ध्वजारोहण के साथ हो गई है। यह धार्मिक आयोजन जुलाई 2028 तक चलेगा। जानें 21 महीने के कुंभ मेले की वजह, अमृत स्नान की प्रमुख तारीखें और इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं।

Nashik Simhastha Kumbh Mela: महाराष्ट्र के नासिक और त्र्यंबकेश्वर में सिंहस्थ कुंभ मेले की शुरुआत ध्वजारोहण के साथ हो गई है। शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को दोनों धार्मिक स्थलों पर एक ही समय दोपहर 12 बजकर 2 मिनट पर कुंभ ध्वज फहराया गया। नासिक में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ध्वजारोहण किया, जबकि त्र्यंबकेश्वर के कुशावर्त तीर्थ में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यह रस्म पूरी की। इस आयोजन के साथ ही अगले करीब 21 महीनों तक चलने वाले सिंहस्थ कुंभ पर्व का औपचारिक आगाज हो गया है।
पहली बार महिला राष्ट्रपति के हाथों ध्वजारोहण
इस बार सिंहस्थ कुंभ का ध्वजारोहण एक खास वजह से भी चर्चा में है। कुंभ पर्व के इतिहास में पहली बार किसी महिला राष्ट्रपति ने ध्वजारोहण किया है। नासिक में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मौजूदगी में हुए इस कार्यक्रम को महाराष्ट्र के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, त्र्यंबकेश्वर में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कुशावर्त तीर्थ पर ध्वज फहराकर धार्मिक आयोजन की शुरुआत की।
नासिक के कुंभ को क्यों कहा जाता है सिंहस्थ?
नासिक और त्र्यंबकेश्वर में आयोजित होने वाले कुंभ को सिंहस्थ कुंभ कहा जाता है। इसके पीछे ज्योतिषीय मान्यता जुड़ी हुई है। मान्यता के अनुसार, जब देवगुरु बृहस्पति सिंह राशि में प्रवेश करते हैं, तब नासिक-त्र्यंबकेश्वर में कुंभ का विशेष योग बनता है। इसी वजह से इस आयोजन को सिंहस्थ नाम दिया गया है। इस दौरान गोदावरी नदी में स्नान का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग और गोदावरी का महत्व
नासिक जिले में स्थित त्र्यंबकेश्वर देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गोदावरी नदी का उद्गम त्र्यंबकेश्वर के पास ब्रह्मगिरि पर्वत क्षेत्र से होता है। इसी कारण कुंभ पर्व में इस स्थान का विशेष महत्व है। नासिक में रामकुंड और त्र्यंबकेश्वर में कुशावर्त तीर्थ श्रद्धालुओं के प्रमुख स्नान स्थल हैं। यहां वैष्णव और शैव अखाड़ों की अलग-अलग धार्मिक परंपराओं के अनुसार स्नान आयोजित किए जाते हैं।
आखिर 21 महीने तक क्यों चलेगा कुंभ मेला?
इस बार सिंहस्थ कुंभ पर्व की अवधि सामान्य आयोजन से काफी लंबी रखी गई है। इसकी शुरुआत 31 अक्टूबर 2026 को ध्वजारोहण से हुई है और समापन जुलाई 2028 में निर्धारित है। इस दौरान धार्मिक परंपराओं, ज्योतिषीय तिथियों, अखाड़ों के कार्यक्रमों और विभिन्न आयोजनों का क्रम जारी रहेगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 24 जुलाई 2028 को त्र्यंबकेश्वर और 29 जुलाई 2028 को नासिक में ध्वजावतरण के साथ आयोजन का समापन होगा।
कुंभ में अमृत स्नान का विशेष महत्व
कुंभ मेले के दौरान पवित्र नदी में शुभ मुहूर्त पर स्नान करना श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा है। मान्यता है कि गोदावरी में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और आध्यात्मिक शांति मिलती है। इस दौरान साधु-संत, नागा साधु और विभिन्न अखाड़ों के महंत भी निर्धारित तिथियों पर अमृत स्नान करेंगे। इन स्नान पर्वों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
सिंहस्थ कुंभ 2026-28: प्रमुख तिथियां
सिंहस्थ कुंभ की शुरुआत 31 अक्टूबर 2026 को ध्वजारोहण के साथ हुई। इसके बाद 29 जुलाई 2027 को नगर प्रदक्षिणा निर्धारित है। पहला अमृत स्नान 2 अगस्त 2027, दूसरा 31 अगस्त 2027 को होगा। तीसरा अमृत स्नान नासिक में 11 सितंबर 2027 और त्र्यंबकेश्वर में 12 सितंबर 2027 को निर्धारित किया गया है। समापन कार्यक्रम के तहत 24 जुलाई 2028 को त्र्यंबकेश्वर और 29 जुलाई 2028 को नासिक में ध्वजावतरण होगा।


