Mohan Bhagwat Vijayadashami speech: भारत में बांग्लादेश-फ्रांस जैसे हालात बनाने की कोशिश: भागवत,बोले- सत्ता बदलकर अपने पिट्ठू बैठाना चाहते हैं, देश तोड़ने में मदद कर रहे कुछ नेता
Mohan Bhagwat Vijayadashami speech: नागपुर में विजयादशमी उत्सव पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने देश को अस्थिर करने वाली ताकतों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कुछ नेता और बाहरी शक्तियां भारत में अशांति फैलाना चाहती हैं।

नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुख्यालय में पारंपरिक विजयादशमी उत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने शस्त्र पूजन कर स्वयंसेवकों और देश को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने भारत की बढ़ती वैश्विक साख की सराहना करते हुए देश को अस्थिर करने में जुटी बाहरी और आंतरिक ताकतों को लेकर गंभीर चेतावनी दी।
पश्चिम से चली 'आसुरी आंधी'
संघ प्रमुख ने पश्चिम देशों की ओर इशारा करते हुए कहा कि दुनिया भर में सांस्कृतिक और मानवीय संस्कारों को नष्ट-भ्रष्ट करने वाली आसुरी प्रवृत्तियां सक्रिय हैं। आज भारत समेत पूरी दुनिया में समझदार लोगों को भी विचलित करने वाला वातावरण जानबूझकर तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी शक्ति और सुनीति के बल पर वैश्विक मंच पर मजबूत स्थान बना रहा है, जिसे दुनिया की कुछ ताकतें पचा नहीं पा रही हैं।
बांग्लादेश और फ्रांस जैसे हालात की साजिश
मोहन भागवत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत में भी बांग्लादेश और फ्रांस जैसे हालात बनाने की कोशिशें हो रही हैं। दुनिया की कुछ शक्तियां अराजकता फैलाकर सत्ता परिवर्तन करना चाहती हैं ताकि वे अपने पिट्ठुओं को सत्ता में बैठा सकें।
उन्होंने चिंता जताई कि इस षड्यंत्र में देश के भीतर के कुछ महत्वाकांक्षी और विवेकहीन नेता भी अपने स्वार्थ के लिए इन ताकतों की मदद कर रहे हैं। भारत, हिंदू समाज और संघ को तोड़ने के लिए सोची-समझी साजिश रची जा रही है।
आंदोलनों को लेकर नसीहत
देश में हो रहे विभिन्न विरोध प्रदर्शनों और आंदोलनों पर बात करते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि समाज में समस्याएं और व्यवस्था की कमियां होना स्वाभाविक है, जिसके चलते आंदोलन भी होते हैं। हालांकि, आंदोलनों का उद्देश्य समाधान होना चाहिए, न कि समाज में द्वेष, तनाव या विभाजन पैदा करना।
अपील की कि राजनीतिक लाभ, वोट बैंक या सस्ती लोकप्रियता के लालच में हमारे संविधान, कानून और भद्र व्यवहार की मर्यादाओं का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। समस्याओं का समाधान केवल शासन या आंदोलनों से नहीं, बल्कि समाज की सक्रियता और आपसी संवाद से भी संभव है।
भाषण की अन्य प्रमुख बातें:-
एकाग्रता और एकता:- यदि देशवासी एकता के सूत्र में बंधे रहें, तो कोई बाहरी ताकत हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती। हमें यह याद रखना चाहिए कि हमारे पूर्वज और संस्कृति एक ही है।
पर्यावरण और विकास:- नेपाल की बाढ़ का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि विकास के लिए तकनीक जरूरी है, लेकिन इससे प्रकृति को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। इकोनॉमी के साथ इकोलॉजी और एथिक्स का तालमेल जरूरी है।
OTT और AI के नियम:- आज मिल रही सूचनाओं के सही-गलत उपयोग पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए स्पष्ट नियम होने चाहिए और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल सावधानी से किया जाना चाहिए।


