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Lalbaugcha Raja: लालबागचा राजा को भक्त चढ़ाते हैं सोने-चांदी की चीजें, मन्नत पूरी होने पर देते हैं खास चढ़ावा, जानें 90 साल पुरानी परंपरा

मुंबई ही नहीं, दुनियाभर में प्रसिद्ध है लालबागचा राजा...

Lalbaugcha Raja: लालबागचा राजा को भक्त चढ़ाते हैं सोने-चांदी की चीजें, मन्नत पूरी होने पर देते हैं खास चढ़ावा, जानें 90 साल पुरानी परंपरा
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Lalbaugcha Raja: मुंबई: दक्षिण मुंबई के परेल इलाके में सजने वाला लालबागचा राजा का दरबार गणेश भक्तों की आस्था का बड़ा केंद्र है। इन्हें ‘नवसाचा गणपति’ यानी मन्नत पूरी करने वाले बप्पा कहा जाता है। गणेशोत्सव के 10 दिनों में यहां आम श्रद्धालुओं के साथ उद्योगपति, नेता और बॉलीवुड सितारे भी दर्शन के लिए पहुंचते हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार, 2026 में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को मनाई जाएगी।

बप्पा को क्या-क्या चढ़ाते हैं भक्त?

लालबागचा राजा के दर्शन के दौरान भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार चढ़ावा देते हैं। गणपति पूजा में दूर्वा, फूल, लाल सिंदूर, अक्षत, फल, नारियल, मिठाई और मोदक चढ़ाने की परंपरा है। इनमें मोदक को गणेशजी का प्रिय भोग माना जाता है।


सोने-चांदी का चढ़ावा भी खास

लालबागचा राजा के दरबार में सामान्य पूजा सामग्री के अलावा भक्त सोने-चांदी की चीजें भी अर्पित करते हैं। इनमें हार, अंगूठी, चेन, मुकुट, मोदक, गणेश प्रतिमा, मूषक और अन्य धार्मिक वस्तुएं शामिल होती हैं। मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार ये चीजें चढ़ाते हैं।

चढ़ावे का क्या होता है?

गणेशोत्सव के बाद मंडल की पुरानी परंपरा के तहत सोने-चांदी की वस्तुओं की नीलामी की जाती है। इससे मिलने वाली राशि का बड़ा हिस्सा जरूरतमंदों की मदद और सामाजिक कार्यों में खर्च किया जाता है।

90 साल पुरानी परंपरा

लालबागचा राजा मुंबई का सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय गणेश मंडल है, जिसका इतिहास और परंपरा 90 साल से भी अधिक पुरानी है। साल 1934 में शुरू हुआ यह मंडल आज न केवल मुंबई बल्कि पूरी दुनिया में आस्था का एक बड़ा केंद्र बन चुका है।

मन्नत की कहानी: साल 1932 में मुंबई के लालबाग इलाके का पेरु चॉल बाजार बंद हो गया था। वहाँ के स्थानीय मछुआरों और व्यापारियों ने मन्नत मांगी थी कि अगर उन्हें बाजार के लिए नई जगह मिल जाएगी, तो वे भगवान गणेश की स्थापना करेंगे।

इच्छा पूरी हुई: मछुआरों के प्रयास और स्थानीय नेताओं की मदद से उन्हें बाजार के लिए वर्तमान जगह मिली। इसके बाद, 12 सितंबर 1934 को पहली बार यहाँ गणेश जी की मूर्ति स्थापित की गई।


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