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China Landslide : नेपाल के बाद चीन में भी तबाही, लैंडस्लाइड में 16 की मौत; 546 लोग लापता, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

चीन के शिजांग (तिब्बत) स्वायत्त क्षेत्र के ग्यिरोंग पोर्ट में भूस्खलन के बाद अब तक 16 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 546 लोग लापता बताए जा रहे हैं।

China Landslide : नेपाल के बाद चीन में भी तबाही, लैंडस्लाइड में 16 की मौत; 546 लोग लापता, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
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बीजिंग। नेपाल-चीन सीमा पर प्राकृतिक आपदा का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। चीन के शिजांग (तिब्बत) स्वायत्त क्षेत्र के ग्यिरोंग पोर्ट में भूस्खलन के बाद अब तक 16 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 546 लोग लापता बताए जा रहे हैं। चीनी अधिकारियों के अनुसार लापता लोगों में 261 विदेशी नागरिक शामिल हैं, जिनमें 49 भारतीय नागरिक भी हैं। बचाव दल लगातार प्रभावित इलाके में तलाशी अभियान चला रहे हैं।

23 देशों के 261 विदेशी नागरिकों का पता नहीं

चीनी अधिकारियों ने बताया कि लापता विदेशी नागरिक 23 देशों से हैं। इनमें नेपाल के 104, भारत के 49, लातविया के 33 और अमेरिका के 18 नागरिक शामिल हैं। ब्रिटेन के 15 नागरिकों के साथ कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के छह-छह नागरिक भी लापता बताए गए हैं। चीन ने संबंधित देशों के दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों को इसकी जानकारी दे दी है।

कुछ ही मिनटों में तबाह हो गया पूरा इलाका

अधिकारियों के मुताबिक यह आपदा बेहद तेजी से आई। वैज्ञानिकों के अनुसार नेपाल में लांगटांग लिरुंग पर्वत की दक्षिणी ढलान पर करीब 5,200 मीटर की ऊंचाई पर ग्लेशियर टूटने से बर्फ और चट्टानों का विशाल मलबा नीचे आया। यह मलबा करीब 22 किलोमीटर तक तेजी से आगे बढ़ता हुआ चीन के ग्यिरोंग पोर्ट तक पहुंचा और लगभग 0.7 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को प्रभावित करते हुए 27 इमारतों व अन्य ढांचों को तबाह कर गया।

ग्लेशियर टूटने को बताया गया आपदा का कारण

चीनी अधिकारियों ने शुरुआती वैज्ञानिक जांच के आधार पर बताया कि 26 अगस्त को ग्लेशियर के टूटने से ice-rock avalanche और उसके बाद debris flow बना। अधिकारियों ने इसे हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर की अस्थिरता से जुड़ी बड़ी प्राकृतिक आपदा बताया है। वैज्ञानिकों ने दीर्घकालिक तापमान वृद्धि और जलवायु परिवर्तन को भी ग्लेशियर की अस्थिरता से जोड़कर देखा है।

2 हजार से ज्यादा बचावकर्मी मैदान में

आपदा के बाद चीन ने बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान शुरू किया है। 2,141 से अधिक बचावकर्मी, 269 वाहन और करीब 3,900 उपकरण राहत कार्य में लगाए गए हैं। प्रभावित क्षेत्र में सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग, स्लोप रडार और हाइड्रोलॉजिकल सेंसर के जरिए हालात पर निगरानी रखी जा रही है।

दो बैरियर लेक पर भी नजर

भूस्खलन के चलते इलाके में बनी दो अस्थायी झीलों की भी लगातार निगरानी की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल इनके बांध अपेक्षाकृत स्थिर हैं, लेकिन किसी भी संभावित बदलाव से दोबारा बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है। भू-विज्ञानी पहाड़ी ढलानों पर नजर रख रहे हैं ताकि दूसरी बार भूस्खलन जैसी स्थिति को रोका जा सके।

विस्थापित लोगों के लिए राहत शिविर

चीनी प्रशासन ने प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालकर अस्थायी आश्रय स्थलों में पहुंचाया है। ग्यिरोंग काउंटी के पांच प्रभावित गांवों के 499 लोगों को पांच अस्थायी राहत केंद्रों में भेजा गया है। वहां भोजन, पानी, जरूरी सामान और चिकित्सा सहायता की व्यवस्था की गई है। विस्थापित लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को देखते हुए मनोवैज्ञानिक परामर्श की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।

नेपाल में भी जारी है भारी तबाही

चीन के तिब्बत क्षेत्र में आई यह आपदा नेपाल में हुई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन से जुड़ी है। Reuters के अनुसार नेपाल और तिब्बत में संयुक्त रूप से 750 मौतों और 3,000 से अधिक लोगों के लापता होने की सूचना है। नेपाल में अकेले 734 मौतें और 2,498 लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई है।

भारतीय नागरिकों की तलाश पर भी नजर

तिब्बत की ओर लापता हुए 49 भारतीय नागरिकों की जानकारी सामने आने के बाद उनकी तलाश और पहचान की प्रक्रिया पर भी नजर बनी हुई है। चीनी प्रशासन ने संबंधित देशों को सूचित किया है और प्रभावित क्षेत्र में व्यापक सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है। अभी तक चीनी अधिकारियों के मुताबिक ग्यिरोंग काउंटी में कोई विदेशी पर्यटक फंसा हुआ नहीं मिला है, हालांकि लापता लोगों की तलाश जारी है।


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