BRICS Summit 2026 New Delhi Declaration: आतंकवाद, गाजा, टैरिफ और AI पर क्या बोला BRICS, नई दिल्ली घोषणापत्र में क्या मिला, 10 पाइंट में समझे बड़ी बातें
BRICS Summit 2026 New Delhi Declaration की 10 बड़ी बातें जानिए। पहलगाम आतंकी हमला, गाजा, ग्लोबल साउथ, टैरिफ, AI और GIFT City Risk Lab समेत अहम मुद्दे समझें।

नई दिल्ली। नई दिल्ली में हुए BRICS शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने 2026 के नई दिल्ली घोषणापत्र को मंजूरी दे दी है। करीब 140 बिंदुओं वाले इस दस्तावेज में आतंकवाद, ग्लोबल साउथ, पश्चिम एशिया, व्यापार, टैरिफ, वित्त, AI और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर BRICS का रुख सामने आया है।
घोषणापत्र का एक अहम हिस्सा भारत की सुरक्षा चिंताओं से जुड़ा है। BRICS देशों ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बात दोहराई। दूसरी ओर, पश्चिम एशिया के बढ़ते तनाव पर संयम, संवाद और कूटनीति का रास्ता अपनाने पर जोर दिया गया।
नई दिल्ली घोषणापत्र की 10 बड़ी बातें
1-ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने पर जोर
BRICS ने वैश्विक फैसलों में विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका बढ़ाने की मांग दोहराई है। समूह का कहना है कि वैश्विक शासन की मौजूदा संस्थाओं में प्रतिनिधित्व ज्यादा संतुलित और व्यापक होना चाहिए।
इसका सीधा संबंध संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में सुधार की मांग से है। BRICS लंबे समय से कहता रहा है कि बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था के हिसाब से इन संस्थाओं में उभरती अर्थव्यवस्थाओं को ज्यादा प्रभाव मिलना चाहिए।
2- संयुक्त राष्ट्र में सुधार और बेहतर प्रतिनिधित्व
BRICS ने बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करने और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर जोर दिया। भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और उभरती शक्तियों को स्थायी प्रतिनिधित्व देने की मांग भी इसी व्यापक एजेंडे का हिस्सा है।
घोषणापत्र में महिलाओं की वैश्विक संस्थाओं में भागीदारी बढ़ाने के विचार को भी महत्व दिया गया है। यह चर्चा इस तथ्य से जुड़ी है कि संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में अब तक कोई महिला महासचिव नहीं बनी है।
3- पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा, भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की जान गई थी। BRICS ने इस हमले की कड़ी निंदा की और आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया।
यह भारत के लिए घोषणापत्र के सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक है, क्योंकि इसमें BRICS के मंच से पहलगाम हमले का स्पष्ट उल्लेख हुआ है।
4-आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस
BRICS ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के खिलाफ सख्त रुख दोहराया। समूह ने सीमा पार आतंकियों की आवाजाही, आतंकवाद की फंडिंग और आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने मिलने जैसी चुनौतियों से निपटने पर जोर दिया।
साथ ही, आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से जोड़ने के विचार को भी खारिज किया गया। BRICS ने आतंकवाद से जुड़े लोगों और उनके समर्थन करने वालों को कानून के तहत जवाबदेह ठहराने की बात कही है।
5- पश्चिम एशिया पर संयम और संवाद का संदेश
BRICS का ध्यान पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर भी रहा। घोषणापत्र में सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और ऐसे कदमों से बचने की अपील की गई जो संघर्ष को और बढ़ा सकते हैं।
समूह ने साफ संकेत दिया कि लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों का समाधान सैन्य टकराव के बजाय संवाद, बातचीत और कूटनीति के रास्ते से तलाशना चाहिए।
6-गाजा, मानवीय मदद और दो-राष्ट्र समाधान
गाजा को लेकर BRICS ने नागरिकों की सुरक्षा और मानवीय सहायता की जरूरत पर जोर दिया है। फिलिस्तीन के सवाल पर समूह का रुख दो-राष्ट्र समाधान के समर्थन के अनुरूप है।
इसका मतलब है कि एक स्वतंत्र और व्यवहार्य फिलिस्तीनी राज्य के साथ इजरायल के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की दिशा में समाधान तलाशने की बात। 1967 की सीमाओं और पूर्वी येरुशलम को राजधानी बनाने वाला ढांचा BRICS के पिछले घोषणापत्रों और 2026 की कूटनीतिक चर्चाओं में भी सामने आता रहा है।
7-एकतरफा टैरिफ और व्यापार प्रतिबंधों पर चिंता
घोषणापत्र में वैश्विक व्यापार व्यवस्था को लेकर भी अहम संदेश है। BRICS ने एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ व्यापार बाधाओं को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बताया है।
समूह ने नियम-आधारित और ज्यादा खुली व्यापार व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया। विश्व व्यापार संगठन के सुधार और उसके विवाद निपटान तंत्र को प्रभावी बनाने की मांग भी इसी एजेंडे से जुड़ी है।
8- AI, क्वांटम टेक्नोलॉजी और साइबर सुरक्षा पर सहयोग
BRICS का एजेंडा अब केवल पारंपरिक व्यापार और राजनीति तक सीमित नहीं है। 2026 में AI और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी उभरती तकनीकों पर भी सहयोग बढ़ाने की कोशिश हुई है।
वित्तीय क्षेत्र में इन तकनीकों से पैदा होने वाले अवसरों और जोखिमों को समझने के लिए उभरती अर्थव्यवस्थाओं के नजरिये से काम करने पर जोर दिया गया है। साइबर सुरक्षा भी सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल है।
9- GIFT City में BRICS Risk Lab का प्रस्ताव
भारत ने गुजरात की GIFT City में BRICS Risk Lab की मेजबानी का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच जोखिम प्रबंधन, साझा मॉडल, विशेषज्ञता और बेहतर प्रथाओं को विकसित करने में सहयोग करना है।
सरल शब्दों में समझें तो इसका फोकस वित्तीय और बीमा क्षेत्र में ऐसे जोखिमों से निपटने की क्षमता बढ़ाने पर है, जो कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ प्रभावित कर सकते हैं।
10- BRICS@20: आवाज से प्रभाव की ओर
2026 BRICS के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि संगठन अपनी स्थापना के दो दशक पूरे होने के पड़ाव पर है। भारत की अध्यक्षता में इस मौके पर BRICS को केवल बातचीत का मंच नहीं, बल्कि वैश्विक फैसलों पर प्रभाव डालने वाले समूह के रूप में आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
इसका व्यापक अर्थ यह है कि सदस्य देशों के बीच साझा घोषणाओं के साथ-साथ ठोस सहयोग और व्यावहारिक परिणामों पर भी जोर बढ़ाया जाए।
घोषणापत्र का बड़ा संदेश क्या है?
नई दिल्ली घोषणापत्र को केवल विदेश नीति से जुड़ा दस्तावेज मानना अधूरा होगा। इसमें एक तरफ पहलगाम जैसे आतंकी हमलों और पश्चिम एशिया के संघर्ष पर सुरक्षा और शांति की बात है, तो दूसरी तरफ टैरिफ, व्यापार, वित्त और तकनीक जैसे सीधे आर्थिक मुद्दे भी हैं।
यानी BRICS अब सुरक्षा और कूटनीति के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक नियमों और तकनीकी व्यवस्था में विकासशील देशों की भूमिका बढ़ाने की दिशा में भी अपनी जगह मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
भारत के लिए इस घोषणापत्र की अहमियत इसलिए भी है कि 2026 की अध्यक्षता के दौरान उसने आतंकवाद, ग्लोबल साउथ, वैश्विक संस्थाओं में सुधार और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों को BRICS के एजेंडे में प्रमुखता दी है।


