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Constitution Of India : आखिर क्यों और किसने बनाया भारत में संविधान? जानें पूरी जानकारी..

Puja Rahi
Constitution Of India
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Constitution Of India

Constitution Of India : भारत का संविधान न केवल देश के प्रशासन की नींव है, बल्कि यह भारत के नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों को परिभाषित करता है। यह हमारे देश के लोकतंत्र, स्वतंत्रता और समानता के आदर्शों को स्थापित करने का दस्तावेज़ है। आइए जानते हैं कि भारत में संविधान क्यों और कैसे बना, इसे कब और कहां तैयार किया गया और किसने इसे तैयार किया।To celebrate Constitution Day, it is also important to read the Constitution

संविधान बनाने की आवश्यकता क्यों पड़ी?

  1. ब्रिटिश शासन का प्रभाव:

    ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में कई कानून लागू किए गए, लेकिन वे भारतीयों की आवश्यकताओं और उनकी संस्कृति के अनुसार नहीं थे। ये कानून ब्रिटिश सरकार के हितों को प्राथमिकता देते थे। भारत को एक स्वतंत्र और प्रगतिशील राष्ट्र बनाने के लिए एक स्वदेशी संविधान की आवश्यकता महसूस हुई।
  2. देश का विविधता भरा समाज:
    भारत एक बहुभाषी, बहु-धार्मिक और बहु-सांस्कृतिक देश है। विभिन्न समुदायों और राज्यों को एकजुट रखने के लिए एक समान संविधान की आवश्यकता थी, जो हर नागरिक के अधिकारों की रक्षा करे।
  3. लोकतंत्र की स्थापना:
    भारत को एक स्वतंत्र लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने के लिए एक मजबूत संविधान जरूरी था। यह संविधान सभी नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता और न्याय का अधिकार देता है।
  4. नए भारत के लिए नई दिशा:
    आजादी के बाद भारत को विकास और प्रगति की दिशा में ले जाने के लिए एक ऐसा संविधान चाहिए था, जो देश को संगठित और एकजुट रख सके।

संविधान कब और कहां बनाया गया?

  • कब: 9 दिसंबर 1946 से संविधान सभा की पहली बैठक शुरू हुई।
  • कहां: संविधान सभा की बैठकें नई दिल्ली के संविधान भवन (अब संसद भवन) में आयोजित हुईं।
  • तैयारी में समय: संविधान बनाने में 2 साल, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा।
  • अंतिम रूप: 26 नवंबर 1949 को संविधान को स्वीकार किया गया।
  • प्रभावी तिथि: 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ।

संविधान बनाने की प्रक्रिया

  1. संविधान सभा का गठन:
    संविधान सभा का गठन 1946 में किया गया। इसके सदस्यों का चुनाव प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा किया गया था। कुल 389 सदस्य थे, लेकिन विभाजन के बाद पाकिस्तान अलग हो गया, और भारत की संविधान सभा में 299 सदस्य रह गए।
  2. संविधान सभा की संरचना:
    • डॉ. राजेंद्र प्रसाद को संविधान सभा का अध्यक्ष चुना गया।
    • डॉ. भीमराव अंबेडकर को संविधान प्रारूप समिति का अध्यक्ष बनाया गया।
    • अन्य प्रमुख सदस्य: पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, सरोजिनी नायडू, और श्यामा प्रसाद मुखर्जी।
  3. प्रारूप समिति का गठन:
    29 अगस्त 1947 को डॉ. अंबेडकर की अध्यक्षता में 7 सदस्यीय प्रारूप समिति का गठन किया गया। इस समिति का मुख्य कार्य संविधान का प्रारूप तैयार करना था।
  4. आधार सामग्री:
    भारत का संविधान दुनिया के कई देशों के संविधानों से प्रेरणा लेकर बनाया गया।

    • ब्रिटेन से संसदीय प्रणाली
    • अमेरिका से मौलिक अधिकार
    • आयरलैंड से राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धांत
    • कनाडा से संघीय व्यवस्था
    • दक्षिण अफ्रीका से संविधान संशोधन की प्रक्रिया
  5. सभी वर्गों की भागीदारी:
    संविधान बनाने की प्रक्रिया में सभी वर्गों, धर्मों, और समुदायों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। महिलाओं और अल्पसंख्यकों की भागीदारी को भी सुनिश्चित किया गया।

संविधान की प्रमुख विशेषताएं

  1. लिखित संविधान:
    भारत का संविधान दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान है। इसमें 395 अनुच्छेद, 22 भाग, और 8 अनुसूचियां थीं (अब संशोधनों के बाद इनकी संख्या बढ़ चुकी है)।
  2. संघीय व्यवस्था:
    भारत में केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का स्पष्ट विभाजन किया गया।
  3. मौलिक अधिकार:
    संविधान में नागरिकों के लिए 6 मौलिक अधिकार प्रदान किए गए। ये हैं:

    • समानता का अधिकार
    • स्वतंत्रता का अधिकार
    • शोषण के खिलाफ अधिकार
    • धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार
    • सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार
    • संवैधानिक उपचार का अधिकार
  4. राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धांत:
    ये सिद्धांत सरकार को देश की आर्थिक और सामाजिक नीति बनाने में दिशा प्रदान करते हैं।
  5. धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र:
    भारत एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक देश है। सभी धर्मों को समान महत्व दिया गया है।

Constitution Of India

डॉ. भीमराव अंबेडकर का योगदान

डॉ. भीमराव अंबेडकर को भारतीय संविधान का "मुख्य वास्तुकार" माना जाता है। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि संविधान सभी वर्गों, विशेष रूप से दलितों और पिछड़े वर्गों, के अधिकारों की रक्षा करे। उनका मानना था कि भारत तभी प्रगति कर सकता है जब हर नागरिक को समान अधिकार मिले।

संविधान का महत्व

  1. कानूनी ढांचा:
    संविधान ने भारत को एक संगठित प्रशासनिक ढांचा प्रदान किया।
  2. लोकतांत्रिक अधिकार:
    यह नागरिकों को स्वतंत्रता, समानता और न्याय का अधिकार देता है।
  3. सामाजिक न्याय:
    यह जाति, धर्म, लिंग और भाषा के आधार पर भेदभाव के खिलाफ है।

भारत का संविधान देश के नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों का आधार है। इसे बनाने में कई महान नेताओं ने अपनी मेहनत और विचार दिए। 26 जनवरी 1950 को संविधान के लागू होने के साथ भारत एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य बन गया। भारतीय संविधान आज भी देश की एकता और अखंडता का प्रतीक है।


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